मोतीपुर (बहराइच)। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से गुजरी नानपारा-मैलानी रेल प्रखंड को बंद करने की कवायद चल रही है। इस कवायद को लेकर विरोध शुरू हो गया है। नानपारा-मैलानी रेल प्रखंड के यात्रियों को गोरखपुर, देवरिया समेत अन्य जिलों की यात्रा करनी पड़ती है। ऐसे में इस रूट पर ट्रेनों का संचालन बंद होने से तराईवासियों को झटका लगेगा। जनपद के लोगों ने सांसद को पत्र सौंपकर समस्या का निदान कराने की मांग की है। सांसद ने बजट सत्र में मुद्दा उठाकर कार्रवाई की बात कही है।
नानपारा-मैलानी रेल लाइन 130 वर्ष अंग्रेजों के जमाने में बिछायी गयी थी। यह रेल लाइन कतर्नियाघाट व दुधवा नेशनल पार्क से होकर गुजरी है। इस रूट पर ट्रेनों की चपेट में आकर दर्जनों बाघ, तेंदुए और अन्य जीव दम तोड़ चुके हैं। इसको लेकर वन विभाग ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने संरक्षित वन क्षेत्र से रेल लाइन बंद करने तथा वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन रेलवे ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था न करके ट्रेन का संचालन बंद करने की कवायद शुरू कर दी है। इससे क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है।
मिहींपुरवा में रेल बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक श्रवण कुमार मदेशिया, व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय सिंह व महामंत्री अतुल चौधरी की अगुवाई में लोगों ने जिलाधिकारी व मुख्यमंत्री के साथ सांसद अक्षयवरलाल गोंड को पत्र सौंपा है। सांसद व उच्चाधिकारियों को सौंपे पत्र में लोगों का कहना है कि इस रूट से अधिकतर लोग आजमगढ़, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, गोंडा, लखीमपुर, कासगंज, बरेली से लेकर दिल्ली की यात्रा करते हैं। व्यापारी भी इन क्षेत्रों से सामान लाते हैं। लेकिन बहराइच-गोंडा आमान परिवर्तन के बाद धीरे-धीरे स्थिति और बदतर होती गई।
ट्रेनों की संख्या कम करने के साथ इसका संचालन बंद करने की तैयारी चल रही है। ऐसे में इस क्षेत्र के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इस मामले में सांसद अक्षयवरलाल गोंड ने समिति के पदाधिकारियों को आश्वासन दिया है कि इसी बजट सत्र में वह ग्रामीणों की समस्या को प्रमुखता से संसद में उठाएंगे। विकल्प के बाद ही ट्रेनों के संचालन को रोकने पर सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी। पत्र सौंपने वालों में अन्य व्यापारी व कस्बेवासी मौजूद रहे।
इन स्टेशन के यात्री होंगे प्रभावित
मैलानी से नानपारा जंक्शन के बीच बेलरांया, पलिया, दुधवा, सोनारीपुर, मंझरा, खैरटिया, तिकुनिया, बिछिया, निशानगाड़ा, मुर्तिहा, ककरहा, मिहींपुरवा, रायबोझा, गायघाट और नानपारा स्टेशन पड़ता है। इसन स्टेशन के यात्रियों को ट्रेन का ही एकमात्र सहारा है। ऐसे में ट्रेन का संचालन बंद होने से काफी परेशानी होगी।
आदेश का अनुपालन करे रेलवे
रेल बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि हाईकोर्ट ने वैकल्पिक व्यवस्था करने के बाद ट्रेन का संचालन बंद करने का निर्देश दिया है। ऐसे में बिना दूसरी रेल लाइन के सर्वे के ट्रेनों का संचालन रोकना तराईवासियों के साथ धोखा है। इस पर रेलवे ध्यान दे, जिससे तराई में निवास कर रहे गरीबों को परेशानी न हो।