कतर्नियाघाट के गेेरुआ घाट में वनकर्मियों ने हाथियों से ढहवाए मकान।
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बिछिया (बहराइच)। कतर्निया के गेरुआ नदी के तट पर करीब नौ परिवार तीन दशक से रह रहे थे। इसमें तीन झोपड़ियां अरसे से खाली थीं। वहीं छह में अभी भी परिवार रह रहे हैं। इन सभी को संरक्षित क्षेत्र में होने के कारण नोटिस जारी किया गया था। शनिवार को वन विभाग के अधिकारियों ने हाथियों से तीन मकान ढहा दिए। जबकि छह परिवारों को फिर से नोटिस जारी करते हुए 15 दिन का समय दिया गया है।
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत गेरुआ नदी के तट पर एक छोटा सा गांव कई वर्षों से बसा हुआ है, जिसमें तीन दशक से नौ परिवार रह रहे हैं।
शनिवार को कतर्नियाघाट के डिप्टी रेंजर रामकुमार दलबल के साथ चंपाकली व जयमाला हथिनी को लेकर मौके पर पहुंचे और यहां बने मंजू देवी, बाबू और लायकराम के घरों को ध्वस्त करवा दिया। वहीं अन्य छह परिवारों को मकान हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।
करीब तीन दिन पहले वनकर्मिर्यों ने मौके पर पहुंचकर घर हटाने की बात कही थी, लेकिन इन लोगों द्वारा जगह खाली नहीं की गई थी। उप प्रभागीय वनाधिकारी यशवंत सिंह ने बताया कि संरक्षित क्षेत्र में किसी भी तरह से निवास करना नियमों के विरुद्ध है, जो तीन झोपड़ियां ढहायी गयी हैं। वह निष्प्रयोज्य थीं। यह लोग दूसरे स्थान पर रहने लगे थे। हालांकि अन्य सभी को जगह खाली करने का निर्देश दिया गया है। उधर, वन विभाग की इस कार्रवाई से पीड़ित ग्रामीणों में आक्रोश है।