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Bahraich News: हर मानसून के साथ लौट आता है बाढ़ का डर

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रामनरेश अपने परिवार के साथ।
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बहराइच। आसमान में बादलों की आवाजाही के साथ ही जिले के बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की धड़कनें तेज होने लगी हैं। महसी, शिवपुर और मिहींपुरवा इलाके के कई गांवों के लोग जरूरी सामान अलग रखने, मवेशियों के लिए सुरक्षित जगह तलाशने और बच्चों के दस्तावेज संभालने में जुट गए हैं। इन परिवारों के लिए बरसात केवल मौसम नहीं, बल्कि हर साल होने वाला विस्थापन और नई परीक्षा है।
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बीते पांच वर्षों से सरयू नदी की बाढ़ से प्रभावित केवलपुर, सेमरही, सीतारामपुरवा, शिवपुर, बेहटा, रानीबाग, पिपरा और किसानगंज जैसे गांवों में रहने वाले लोगों का कहना है कि जून-जुलाई आते ही रातों की नींद उड़ जाती है। उन्हें सबसे ज्यादा चिंता बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों की रहती है।
पहले सामान बचाते हैं, फिर जान
चुरईपुरवा निवासी अवधराम बताते हैं, पिछले साल रात में पानी गांव में घुस गया था। परिवार को नाव से बाहर निकालना पड़ा। गेहूं, धान का बीज और घर का सामान सब खराब हो गया। मकान नदी में समाहित हो गया। इस बार पहले से ही गठरी बांधकर रखी है।
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यादव पुरवा गांव के रामनरेश ने कहा कि 2024 की बाढ़ में पूरी गृहस्थी तबाह हो गई थी। छप्पर का ही सहारा है। बाढ़ आने पर सबसे पहले अनाज डूब जाता है। बच्चों की किताबें भी हर साल खराब होती हैं। पानी उतरने के बाद घर रहने लायक बनाने में डेढ़-दो महीने लग जाते हैं।
इसी गांव के पशुपालक चेतराम बताते हैं, पिछले साल दो भैंसों को सुरक्षित स्थान तक ले जाने में पूरी रात लग गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार बाढ़ आने से बच्चों की पढ़ाई, खेती और रोजगार पर असर पड़ता है। कई परिवार अब स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर बसने की सोच रहे हैं, लेकिन आर्थिक स्थिति इसकी अनुमति नहीं देती।
संकट में सहारा बनते हैं तीन बाढ़ शरणालय
महसी तहसील में बाढ़ आने पर प्रभावित ग्रामीणों के लिए पूरे प्रसाद, भगवानपुर और केवलपुर में तीन बाढ़ शरणालय स्थापित हैं। जलस्तर बढ़ने पर इन शरणालयों में लोगों को सुरक्षित ठहराने, भोजन, पेयजल, चिकित्सा और आवश्यक राहत सामग्री की व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा राहत चौकियां भी सक्रिय कर प्रशासनिक निगरानी बढ़ाई जाती है।
संवेदनशील गांवों की लगातार निगरानी
एसडीएम महसी प्रकाश सिंह ने बताया कि बाढ़ से निपटने की सभी तैयारियां समय रहते पूरी की जा रही हैं। संवेदनशील गांवों की लगातार निगरानी की जा रही है और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। बाढ़ शरणालयों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। नावों, राहत सामग्री और मेडिकल टीमों की व्यवस्था भी कर ली गई है।
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