बहराइच में सोमवार दोपहर में रोजमर्रा की तरह लोग अपने काम में व्यस्त थे। तभी 02:47 बजे अचानक धरती हिलने का एहसास हुआ। पहले तो लोगों ने समझा कि उन्हें चक्कर आ रहा है, लेकिन जब घर में रखी टीवी, फ्रिज, सीलिंग फैन तेजी से हिलने लगे तो समझते देर नहीं लगा कि यह भूकंप है। घर, गृहस्थी छोड़ परिवार के सदस्यों को पुकारते हुए लोग घर के बाहर भागे। लेकिन तभी धरती की थरथराहट थम गई।
इस पर लोगों ने राहत की सांस ली। लेकिन जिन लोगों ने भूकंप को एहसास किया, उनके चेहरे पर भूकंप की दहशत साफ दिखाई पड़ रही थी। मुुश्किल से छह से सात सेकेंड का झटका था। एहसास सिर्फ उन्हें हुआ, जो शांतिपूर्ण माहौल में बैठे हुए थे। सड़क पर चल रहे लोगों को सिर्फ चक्कर आने जैसा आभास हुआ।
भूकंप के झटके महसूस होने के दौरान ही बिजली सप्लाई ठप कर दी गई। हालांकि आधे घंटे बाद सप्लाई पुन: चालू हो गई। अफगानिस्तान और पाकिस्तान में भूकंप के झटकों से मची तबाही जब लोगों ने टीवी पर देखा तो सबके जेहन में एकबार फिर अप्रैल में नेपाल में हुई तबाही की याद ताजा हो गई।
पहले लगा चक्कर आया, फिर शोर मचाते हुए भागे
शहर के काजीपुरा निवासी सोनू का कहना है कि दोपहर में पौने तीन बजे के
आसपास खाना खाने के बाद घर में अराम कर रहे थे। तभी लगा कि बेड हिल रहा है।
पहले समझा कि चक्कर आया है, लेकिन जब पंखा और टीवी भी हिलते देखा तो शोर
मचाते हुए घर के बाहर भागे। कुछ यही स्थिति खत्रीपुरा निवासी तनवीर की थी।
वह भी घर में बैठे हुए थे। भूकंप का एहसास होने के बाद भागकर द्वार पर पहुंचे। वहीं चांदपुरा निवासी सगीर भूकंप के समय दुकान में थे। सगीर का कहना है कि पल भर तो लगा कि कुर्सी से किसी ने धक्का दिया है। लगा कि हमें चक्कर आया है, लेकिन कर्मचारियों ने भी जब यही बात कही तो समझ में आ गया कि भूंकप है।
भागकर सड़क पर पहुंच गया। बड़ीहाट निवासी अबरार भी भूकंप के समय दुकान पर थे। अबरार ने कहा कि वह तत्काल समझ गए कि भूकंप है। जिसके चलते आस पड़ोस के लोगों को शोर मचाकर आगाह किया। अबरार ने कहा कि देर शाम तक सकते में रहे कि कहीं फिर जलजला न आ जाए।
डेंजर जोन चार में शामिल है बहराइच
हिमालय की तलहटी में बसा बहराइच भूकंप की दृष्टि से काफी संवेदनशील है। जिला सर्वाधिक खतरनाक डेंजर जोन 4 में स्थित है। सोमवार दोपहर में तराई में महसूस किए गए। भूकंपविदों की मानें तो 72 घंटो में धरती में फिर हलचल हो सकती है। लेकिन इस हलचल का असर तराई में नहीं पड़ेगा।
हिमालय की तलहटी का इलाका भूकंप की दृष्टि से काफी संवेदनशील है। बहराइच के साथ-साथ प्रदेश के देवरिया, गोरखपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सिद्धार्थनगर, अलीगढ़, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर, बुलंदशहर, लखीमपुर, सीतापुर, फैजाबाद, बाराबंकी, सहारनपुर, बरेली समेत 22 जिले सर्वाधिक खतरनाक डेंजर जोन चार में शामिल हैं। बीती 25 व 26 अप्रैल को आए भूकंप से जिले में भरी बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था।
18 मकान दरक गए थे। भगदड़ में आठ लोग घायल हुए थे। उस समय भूकंप की तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर 7.9 मापी गई थी। भूकंप से होने वाली त्रासदी को रोकने के लिए भी प्रशासन की ओर से भी कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए हैं। जनपद में अधिकांश संख्या में ऐसी इमारते हैं जो भूकंप के हल्के झटके सहने में भी नाकाम साबित हो सकती हैं।
आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जिला मुख्यालय, रिसिया, नानपारा व कैसरगंज मेें शिविर का आयोजन कर लोगों को भूकंप के समय बचाव के उपाय अपनाने का प्रशिक्षण प्रदान तो किया गया, लेकिन शिविर आयोजन के बाद आपदा प्रबंधन विभाग आम आदमी की जागरूकता के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
सजग रहने की जरूरत
फसल अनुसंधान केंद्र के मौसम विभाग के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि सोमवार को भूकंप का हलका झटका महसूस हुआ। लेकिन भूकंप का केंद्रबिंदु अफगानिस्तान के हिंदुकुश में होने के चलते झटका काफी मामूली था। उन्होंने बताया कि तराई में रिएक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 2.8 के आसपास मापी गई है। बहराइच वेधशाला के सहायक वैज्ञानिक अंबरीश शुक्ला ने कहा कि हल्का झटका था। इससे कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन सजग रहने की जरूरत है। क्योंकि एकबार भूकंप आने पर आगामी तीन दिन तक झटके महसूस होने की संभवनाएं रहती हैं।
है अजब संयोग
गौरतलब हो कि नेपाल में जिस भूकंप से तबाही मची थी। वह भूकंप दूसरी बार 26 अप्रैल को आया था। जबकि 25 अप्रैल को आधे-आधे घंटे के अंतराल पर दो झटके महसूस किये गए थे। सोमवार को भी 26 तारीख ही थी। जब भूकंप से धरती हिली।
भूकंप आने पर क्या करें
किसान पीजी कॉलेज के प्राचार्य व भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सिंह का कहना है कि भूकंप के झटके महसूस होने पर हर संभव प्रयास करें कि घर से बाहर निकल कर मैदान में पहुंच जाएं। अगर यह संभव नहीं है तो मजबूत मेज के नीचे या लिंटर के नीचे खड़े होकर स्थिति सामान्य होने का इंतजार करें। इससे जान बच सकती है।