पंचायत निर्वाचन नामावली के वृहद पुनरीक्षण के दौरान मूल जनसंख्या से कई गुना अधिक वोटर बनाने वाले दो बीएलओ पर आखिरकार गाज गिर ही गई। एक बीएलओ को निलंबित कर दिया गया। जबकि एक अन्य बीएलओ के सेवा समाप्ति का नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई अमर उजाला के 27 जुलाई के अंक में प्रकाशित खबर के बाद की गई।
पंचायत निर्वाचन नामावली के वृहद पुनरीक्षण का कार्य समाप्त होने के बाद 26 जुलाई को इसकी वृहद समीक्षा की गई। समीक्षा के बाद जमुनहा विकास खंड में वोटर बनाने की प्रक्रिया में भारी धांधली का खुलासा हुआ। इस खुलासे के अनुसार ग्राम पंचायत गंगाभागड़ में जहां चिह्नित 57 के सापेक्ष 1035 मतदाता दर्शाए गए थे। ऐसे ही ग्राम बेलरी की भी स्थिति थी। यहां कुल जनसंख्या 805 के सापेक्ष 1150 मतदाता बनाए गए थे। इस खबर को अमर उजाला ने अपने 27 जुलाई के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। प्रकाशन के बाद प्रशासन हरकत में आया।
इन दोनों गांवों की सूची फिर पुनरीक्षण कराई गई। पाया गया कि गंगाभागड़ ग्राम में मात्र 112 मतदाता ही निवासी हैं। इनमें से 92 मतदाताओं का नाम सूची में पहले से ही दर्ज था। 20 मतदाता ही छूटे हुए थे। लेकिन इनके स्थान पर 1035 मतदाता दर्शाए गए। यही नहीं जांच के दौरान इसका भी खुलासा हुआ कि गंगाभागड़ के अधिकांश परिवार राप्ती नदी की बाढ़ के कारण समीपवर्ती गांव लालबोझा दर्वेश के बंधे के किनारे बस गए हैं।
इस विस्थापन के कारण उन्हें वर्ष 2011 की जनगणना में ग्राम गंगाभागड़ में शामिल नहीं किया गया था। इसके चलते वह सब लालबोझा दर्वेश गांव के निवासी हो चुके हैं। ऐसे ही बेलरी में हुआ। इस ग्राम पंचायत में मात्र 70 मतदाता ही पुन: जांच के दौरान निवासी पाए गए। इसमें से 65 मतदाताओं का नाम सूची में पहले से ही दर्ज था। पांच मतदाता ही बचे थे। जबकि यहां 1150 मतदाता दर्शा दिए गए। इस गांव के भी लोग बाढ़ के कारण लाल बोझा दर्वेश गांव के बंधे के किनारे बसे हुए हैं और वहीं के निवासी हो चुके हैं।
ऐसे में दोनों गांवों में बीएलओ द्वारा धांधली का खुलासा होने के बाद गंगाभागड़ के बीएलओ सहायक अध्यापक श्याम सुंदर पाठक को डीएम के आदेश पर निलंबित कर दिया गया है। जबकि बेलरी के बीएलओ सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के संविदा समाप्ति का नोटिस डीएम के आदेश पर ही जारी किया गया है। इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षाधिकारी महेश प्रताप सिंह बताते हैं कि तहसील की रिपोर्ट में दोनों बीएलओ गंभीर रूप से दोषी पाए गए थे। इसलिए यह कार्रवाई की गई है।