बिछिया। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में हाथियों की हलचल से बुधवार को दिनभर दहशत का माहौल रहा। सुबह से शाम तक चार अलग-अलग स्थानों पर हाथियों ने उत्पात मचाया। बिछिया–सुजौली मार्ग पर करीब डेढ़ घंटे तक आवागमन ठप रहा। बोर्ड परीक्षा देने जा रहे छात्रों को रास्ता बदलना पड़ा, जबकि आंबा गांव में लगभग 40 बीघा फसल रौंद दी गई। शाम करीब साढ़े चार बजे एक टस्कर ने मुख्य मार्ग पर बाइक सवारों को दौड़ा लिया।
बुधवार सुबह गिरिजापुरी पेट्रोल पंप के पास एक हथिनी अपने बच्चे के साथ सड़क पर आ गई और बाइक सवारों पर हमला कर दिया। सुजौली निवासी चुनक्का (45) व बुद्धूपुरवा, मिहीपुरवा निवासी अब्दुल हलीम खान (65) ने बाइक छोड़कर किसी तरह जान बचाई।
करीब आधे घंटे तक चले वन विभाग के सर्च ऑपरेशन के बाद दोनों सुरक्षित मिले। घटना के बाद लंबे समय तक लोग इस मार्ग से गुजरने में डरते रहे।
रेंजर आशीष गौंड, वन दरोगा राधेश्याम और वन रक्षक संतोष कुमार ने मौके पर पहुंचकर लोगों को सतर्क किया। सुजौली थाने के एसआई अक्षयलाल, हीरालाल यादव और संजय गौड़ ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया।
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नाबतोड़–मटेही मार्ग पर दो दर्जन हाथियों का जमावड़ा
निशानगाड़ा रेंज में नाबतोड़–मटेही मार्ग पर करीब दो दर्जन हाथियों का झुंड कई घंटों तक डटा रहा। इससे आवागमन बाधित हो गया और बोर्ड परीक्षा देने जा रहे विद्यार्थियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ा। रेंजर सुरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि वन दरोगा इशरार अहमद के नेतृत्व में टीम तैनात कर मेगाफोन से लोगों को लगातार सतर्क किया जा रहा है।
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आंबा गांव में 40 बीघा फसल बर्बाद
बुधवार तड़के आंबा गांव में घुसकर हाथियों के झुंड ने करीब 40 बीघा गन्ना और गेहूं की फसल रौंद दी। इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ। किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
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शाम को टस्कर ने फिर रोका ट्रैफिक
बुधवार शाम करीब साढ़े चार बजे जमुनिहा मोड़, बदलू चौराहे के पास एक टस्कर हाथी अचानक सड़क पर आ गया। बिछिया निवासी सुजीत निषाद और उनके चाचा राजकुमार लाला बाइक छोड़कर भागे। हाथी करीब 10 मिनट तक सड़क पर खड़ा रहा और एक ट्रक से गिरे गन्ने को खाने लगा, जिससे मार्ग पर जाम लग गया।
घटनास्थल के पास गश्त कर रहे रेंजर आशीष गौंड, वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन और उनकी टीम ने सायरन व पटाखों की मदद से हाथी को जंगल की ओर खदेड़ा। इसके बाद आवागमन सामान्य हो सका।
वन विभाग ने तीन टीमें तैनात कर निगरानी बढ़ा दी है। लोगों से अपील की गई है कि हाथियों, विशेषकर उनके बच्चे के पास न जाएं और किसी भी गतिविधि की सूचना तत्काल विभाग को दें।
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हाथियों के अचानक आक्रामक होने के कारण
- खाद्य और जल की कमी : जंगल में प्राकृतिक खाने-पीने की वस्तुएं सीमित हो गई हैं।
- मानव हस्तक्षेप : सड़क और बस्तियों के पास पहुंचने से हाथियों में तनाव और आक्रामकता बढ़ती है।
- प्रजनन और बच्चे की सुरक्षा : हथिनी अपने बच्चे के साथ सतर्क और आक्रामक रहती हैं।
- मौसमी बदलाव : गर्मियों में पानी और घास की कमी से हाथी अनियंत्रित होकर गांवों और सड़कों की ओर बढ़ जाते हैं।