निकाह की खुशियां उस वक्त काफूर हो गईं, जब वर-वधू पक्ष के लोगों में विचाराधारा को लेकर विवाद हो गया। गौसिया जामा मस्जिद के इमाम हाफिज अख्तर ने निकाह पढ़ाने से भी इन्कार कर दिया। बारात लौट गई, इसके बाद धर्मावलंबियों की सहमति पर परिवार वालों ने बेटी की शादी दूसरे लड़के के साथ कर दी।
चार दिन पुराने मामले पर इमाम हाफिज अख्तर अली ने रविवार को जारी विज्ञाप्ति में कहा कि एक पक्ष देवबंदी और बहावी था, इसलिए निकाह मुमकिन नहीं था। दरअसल, नाजिरपुरा मोहल्ला निवासी इनायत अली के बेटे का निकाह दरगाह थाना क्षेत्र के नेवरैय्या गल्लामंडी मोहल्ला निवासी मोहम्मद इस्माइल की बेटी अफसाना के साथ तय हुआ था।
20 जनवरी को निकाह होना था। बारात लेकर इस्माइल के घर पहुंची। लेकिन यहां इनायत अली व उनके परिवार वालों की विचाराधारा वधू पक्ष के घरवालों से मेल नहीं खायी। जामा मस्जिद के इमाम व खतीब हाफिज अख्तर अली ने भी निकाह पढ़ाने से इन्कार कर दिया।
अख्तर अली ने इनायत अली व उसके परिवार वालों पर देवबंदी वहाबी विचाराधारा से प्रभावित होने का आरोप लगाया है। इस पर मोहम्मद इस्माइल ने बेटी अफसाना का निकाह तोड़ते हुए बारात वापस लौटा दी।
इस बीच सुन्नी मजहब के जानकार बलरामपुर से आए मोहम्मद शाहिद नूरी ने दरगाह थाना क्षेत्र अंतर्गत सुसरौली निवासी खलील अहमद व उसके बेटे इकराम अहमद को अफसाना के साथ निकाह करने के लिए राजी किया। इसके बाद अफसाना व इकराम अहमद को दांपत्य जीवन के सूत्र में बांधा गया।