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भारतीय संस्कृति को मिटाने के लिए तोड़े गए थे मंदिर

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बहराइच के सिद्धनाथ मंदिर में प्रेसवर्ता करते महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि। - फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। अखिल भारतीय साधु परिषद के प्रवक्ता व अनंत श्री विभूषित जीवनदीप पीठाधीश्वर, महामंडलेश्वर (जूना अखाड़ा) स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने शहर के श्री सिद्धनाथ मंदिर में पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति को मिटाने के लिए धर्म विरोधियों ने देश के विभिन्न मंदिरों को तोड़ा था।
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महामंडलेश्वर ने देश की बढ़ती आबादी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया की 20 फीसदी आबादी भारत में रहती है, जबकि यहां संसाधन सिर्फ दो प्रतिशत हैं। ऐसे में देश को सुरक्षित रखने के लिए प्रधानमंत्री को जनसंख्या कानून लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनसंख्या कानून लागू करने में जितनी देर होगी, उतना ही देश को नुकसान होगा। महामंडलेश्वर ने कहा कि भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए समान नागरिक कानून को भी लागू किया जाना बहुत जरूरी है। इसके लिए प्रधानमंत्री से मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि देश में अल्पसंख्यक के नाम पर जो तुष्टिकरण हो रहा है, उसे रोकना होगा। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक उसे कहते हैं जो समाज अपनी जमीन, राज्य से निर्वासित किया गया हो और उसे अधिकार से वंचित किया गया हो। देश में सिर्फ तिब्बती, फारसी व काश्मीरी ब्राह्मण ही अल्पसंख्यक की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति को मिटाने के लिए धर्म विरोधियों ने सूर्य मंदिर, भगवान श्रीराम जन्मभूमि, श्री कृष्ण जन्मभूमि समेत हजारों मंदिरों को तोड़ा था। इससे पहले महामंडलेश्वर ने श्री सिद्धनाथ मंदिर में पूजन अर्चन भी किया। इस मौके पर मंदिर के महंत महामंडलेश्वर रवि गिरि जी महाराज आदि मौजूद रहे।
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