तेलियनपुरवा में कटान के कारण अपने घराें को तोड़ते ग्रामीण।
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तराई व नेपाल के पहाड़ों पर रुक रुक कर हो रही वर्षा के चलते घाघरा नदी के जलस्तर में उतार चढ़ाव की स्थिति है। इससे कटान तेज हो गई है। महसी तहसील के तेलियनपुरवा गांव में ग्रामीणों के नौ मकान कटने के साथ गांव का अस्तित्व सोमवार को खत्म हो गया। वहीं चुरईपुरवा गांव अब नदी के निशाने पर है। 240 बीघा खेती योग्य जमीन भी कटान की भेंट चढ़ी है।
तराई में मौसम रह-रह कर करवट ले रहा है। कभी झमाझम बरसात होती है तो कभी तेज धूप। तराई के साथ नेपाल के पहाड़ों पर रुक-रुक कर हो रही वर्षा से नदी के जलस्तर में भी उतार-चढ़ाव की स्थिति है। एकबार फिर घाघरा नदी का जलस्तर एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से एक सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है।
लेकिन कटान और तेज हुई है। महसी तहसील का तेलियनपुरवा गांव राजस्व नक्शे से सोमवार को मिट गया। इस गांव में 60 मकान थे। 30 मकान वर्ष 2016 की बाढ़ में नदी में समाहित हुए थे। शेष मकान पर जून माह से कटान चल रही है। गांव निवासी मकबूल, साकिर, जाबिर, सालिम, मासूम अली, शेहरे आलम, शहर बानो, बसंत और कमलेश के मकान रात से सोमवार दोपहर तक कट गए।
ग्रामीण आशियाने उजाड़कर खपरैल और दीवार की कुछ ईंटे ही बचा पाए। जैसे-तैसे गृहस्थी ही बची। पूरा गांव नक्शे से खत्म हो गया। पीड़ित ग्रामीण बेलहा-बेहरौली तटबंध और सड़क के किनारे शरण लिए हुए हैं। वहीं अब नदी ने चुरईपुरवा गांव पर कटान शुरू कर दी है। इससे यहां के ग्रामीण दहशत में हैं। सभी आशियाने उजाड़कर पलायन कर रहे हैं।