कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के मोतीपुर रेंज में 20 जनवरी को आबादी से सटे इलाके में एक किशोरी लहूलुहान हालत में मिली थी। ग्रामीणों की सूचना पर मोतीपुर पुलिस ने उसे सीएचसी में भर्ती कराया। वहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां पर इलाज के दौरान उसके घाव तो भर गए। लेकिन मानसिक अस्वस्थता से उसके हाव-भाव अजीब तरह के रहे। जिससे किसी ने उसे मोगली गर्ल घोषित किया तो किसी ने जंगल में वन्यजीवों के बीच किशोरी के रहन-सहन की बात कही। वहीं किशोरी का इलाज कर रहे बाल रोग विशेषज्ञ उसके नेपाली मूल के होने की आशंका जता रहे हैं। सीएमओ ने किशोरी का स्वास्थ्य परीक्षण किया तो वह मानसिक रूप से पूरी तरह अक्षम मिली।
कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के मोतीपुर रेंज अंतर्गत नैनिहा गांव जंगल से सटा है। इस गांव से 200 मीटर की दूरी पर 20 जनवरी को किशोरी बदहवास मिली थी। सूचना पर मोतीपुर पुलिस ने उसे सीएचसी में भर्ती कराया। 25 जनवरी को उसे बहराइच जिला अस्पताल पहुंचाया गया। किशोरी का इलाज जिला अस्पताल में वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने शुरू किया।
अमर उजाला से बातचीत में डॉ. वर्मा ने बताया कि किशोरी जब अस्पताल लाई गई थी तो उसके हाथ और पैरों में गहरे जख्म थे। किशोरी नेपाली मूल की लग रही है। वह बदहवास हालत में थी। इलाज शुरू हुआ तो डेढ़ माह में फिजिकली तौर से पूरी तरह स्वस्थ हो गई। लेकिन इसके बाद पता चला कि वह मंदबुद्धि की है।
उन्होंने कहा कि मानसिक अस्वस्थता से किशोरी की हरकतें अजीब तरह की हैं। किशोरी को मानसिक रोग विशेषज्ञ के इलाज की जरूरत है। इसके लिए किशोरी को केजीएमयू लखनऊ रेफर करने को पत्र लिखा है।
उधर, सीएमओ डॉ. अरुणलाल ने बताया कि किशोरी मानसिक रूप से पूरी तरह अक्षम है। चिकित्सीय परीक्षण के दौरान गुरुवार को इसकी पुष्टि हुई है। वहीं, किशोरी को भर्ती कराने के बाद मोतीपुर पुलिस ने किनारा कस लिया। वहीं अस्पताल प्रशासन भी सिर्फ बाल कल्याण समिति को पत्र लिखने तक सीमित रहा। बाल कल्याण समिति के अधिकारी भी कागजी घोड़े दौड़ाते रहे। एकबार भी कोई भी सदस्य किशोरी को देखने नहीं पहुंचा।
वन ग्रामीणों के मुद्दों पर काम करने वाले डेवलेपमेंट ह्यूमन एडवांसमेंट के मुख्य कार्यकारी डॉ. जीतेंद्र चतुर्वेदी ने कहा कि 15 वर्षों से वन ग्रामीणों के बीच काम कर रहा हूं। जंगल बहुत छोटा है। कोई कोना ऐसा नहीं है, जहां मानव दखलंदाजी न हो। आए दिन बाघ और तेंदुए जंगल के बाहर निकल आते हैं। आम आदमी निवाला बनता है। ऐसे में 13 वर्षीय किशोरी के वन्यजीवों के साथ रहने की कहानी गढ़ना हास्यास्पद है।
अध्यक्ष बाल कल्याण समिति डॉ. राधेश्याम वर्मा ने कहा कि जंगल में मिली किशोरी के मामले में अस्पताल प्रशासन को कई बार पत्र लिखा। सीएमएस ने तो उसे मानसिक स्वस्थ घोषित किया था। पुन: पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। किशोरी को लखनऊ इलाज के लिए भेजना ही उचित है। वह मानसिक मंदबुद्धि है।