मिहींपुरवा (बहराइच)। कतर्नियाघाट के घने जंगलों से सटे गांवों में हिंसक वन्यजीवों का खौफ गहराता जा रहा है। जंगल से निकलकर बाघ और तेंदुए ग्रामीणों की जान ले रहे हैं। सोमवार को बाघ के हमले में हुई रीता की मौत इसी सिलसिले का हिस्सा है। दो साल में बाघ के हमले में यह छठी मौत है। सोमवार सुबह अमृतपुर गांव के खाले थनईया में हुई घटना ने एक बार फिर लोगों में दहशत पैदा कर दी है। खेतों में मौजूद ग्रामीणों के मुताबिक बाघ ने सोतिया नाले के किनारे घास काटने गई रीता देवी की गर्दन दबोच ली, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। रीता देवी अपने पीछे तीन मासूम बच्चों को छोड़ गई हैं। उनके पति मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। परिवार की जिम्मेदारी पूरी जिम्मेदारी रीता के कंधों पर ही थी। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग से सटे अमृतपुर, मंझाव, सुरजीपुरवा, मटेही, हरखापुर, सुजौली, रामपुरवा और आसपास के गांवों में बाघ और तेंदुए के हमले लगातार में कई परिवार अपने कमाऊ सदस्य खो चुके हैं।
बाघों की बढ़ी है संख्या
वन्यजीव विशेषज्ञों आनंद कुमार का मानना है कि कतर्नियाघाट में बाघों की बढ़ती संख्या वन्यजीव संरक्षण की बड़ी सफलता है। बेहतर संरक्षण और सुरक्षित आवास के कारण बाघों की संख्या बढ़ी है, लेकिन इसके साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष भी तेजी से बढ़ा है। विशाल जंगल क्षेत्र, सीमित संसाधन और अपेक्षाकृत कम वनकर्मियों के कारण निगरानी हर जगह प्रभावी नहीं हो पाती। यही वजह है कि जंगली जानवर अक्सर आबादी तक पहुंच जाते हैं।
विशेषज्ञों का सुझाव
जंगल और गांवों के बीच प्रभावी बफर जोन, सौर फेंसिंग, आधुनिक कैमरा ट्रैप, संवेदनशील इलाकों की पहचान और त्वरित निगरानी व्यवस्था जरूरी है। नियमित जागरूकता अभियान और वनकर्मियों की संख्या बढ़ाकर बाघ और तेंदुओं के हमलों के हादसों को कम किया जा सकता है।
बाघ के हमलों में इनकी हुई मौत
तिथि रेंज/ग्राम मृतक
21 अक्तूबर 2024 सुजौली रेंज के ग्राम त्रिलोकी गौढ़ी, रत्तीराम (45)
4 जनवरी 2025 कतर्नियाघाट रेंज, मंझरा बीट
परशुराम (14)
18 जनवरी 2025 सुजौली रेंज, रमपुरवा बनकटी शिवधर चौहान
15 सितंबर 2025 धर्मापुर रेंज, त्रिमुहानी, इंदल (28)
26 अक्तूबर 2025 सुजौली रेंज, रामपुरवा मुखिया फार्म संजीत (21)
25 मई 2026 मुर्तिहा रेंज, अमृतपुर पुरैना रीता (45)