साइबेरियन पक्षियों की आमद जिले में शुरू हो गई है। इकौना स्थित सीताद्वार झील, राप्ती नदी के चिह्नित दो स्थानों के साथ सिरसिया के रामपुर बांध क्षेत्र में इन विदेशी मेहमानों का कलरव सुनाई दे रहा है। इन स्थानों के अतिरिक्त भी राप्ती नदी में कई स्थानों पर विदेशी मेहमान देखे जा रहे हैं।
चार माह तक ये मेहमान जिले के इन नदी व बांध क्षेत्रों में अपना डेरा जमाए रहेंगे। साइबेरिया, पश्चिम व मध्य एशिया के साथ उत्तरी यूरोप के कुछ पक्षियों को जिले की आब-ओ-हवा रास आती है। इसी के चलते ठंड की शुरुआत होते ही हजारों मील का सफर तय करके ये पक्षी हिमालय पर्वत शृंखलाओं को पार करके जिले में आते हैं।
नवंबर माह से ही इन विदेशी मेहमानों का आना शुरू हो जाता है। जिले में सबसे अधिक साइबेरियन पक्षी सीताद्वार झील व राप्ती नदी के विभिन्न इलाकों में अपना डेरा जमाते हैं। वहीं जब फरवरी माह में हल्की गर्मी का अहसास होता है तो ये विदेशी मेहमान फिर से अपने वतन को लौट जाते हैं।
यहां डालते डेरा ः इकौना के सीताद्वार झील, राप्ती नदी में जमुनहा के पास, भिनगा स्थित इसी नदी में भकला पुल के निकट, सिरसिया में रामपुर बांध विदेशी मेहमानों की पसंदीदा जगह।
आते ये मेहमान ः साइबेरिया से लालसर, नीलसर, मुर्गाबी व कामनकूथ (टिकरी) प्रजाति के जबकि पश्चिम व मध्य एशिया से कामनकूथ व उत्तरी यूरोप से मुर्गाबी का आगमन होता है।
शिकारियों की भी रहती नजर ः पिछले साल के आंकड़ों पर गौर करें तो सीताद्वार झील पर शिकारियों का सबसे ज्यादा हमला हुआ। यहां से मुर्गाबी व लालसर का शिकार सबसे ज्यादा किया गया।
एक हजार में बिकता पक्षी ः लालसर व मुर्गाबी का किया गया अवैध शिकार चोरी छिपे ही लेकिन प्रति पक्षी इसकी कीमत एक हजार रुपये से ऊपर होती है। पिछले वर्ष साइबेरियन पक्षी अवैध रूप से एक हजार तक में बिके थे।