भारत-नेपाल सीमा पर स्थित प्रवेशद्वार।
रुपईडीहा। भारत-नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र को रेल नेटवर्क से जोड़ने की कवायद सात साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। वर्ष 2018 में रुपईडीहा से नेपाल के कोहलपुर तक करीब साढ़े 16 किलोमीटर रेल लाइन विस्तार का सर्वे पूरा कर प्रारंभिक नक्शा और रिपोर्ट नेपाल सरकार को सौंप दी गई थी। प्रस्तावित रेलमार्ग के दोनों ओर केंद्र से 20-20 मीटर यानी कुल 40 मीटर क्षेत्र का रेखांकन तक किया गया था। इसके बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। रुपईडीहा तक ब्रॉडगेज रेल सेवा विस्तार के बाद नेपालगंज के व्यापारियों और उद्योग जगत ने एक बार फिर रुपईडीहा-कोहलपुर रेल लाइन का काम शुरू कराने की मांग तेज कर दी है।
पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर ने रुपईडीहा से कोहलपुर तक रेल लाइन विस्तार के लिए अप्रैल 2018 में प्रारंभिक नक्शा तैयार कर नेपाल सरकार को सौंपा था। इसके बाद पूर्वोत्तर रेलवे की ओर से भेजी गई आरके टेक्नो कंसल्टेंसी की तकनीकी टीम ने इंजीनियर संतोष त्रिपाठी के नेतृत्व में सर्वे किया। टीम ने रुपईडीहा से बालेगांव, पुरैना, पुरैनी होते हुए रांझा एयरपोर्ट के दक्षिण से नेपालगंज-कोहलपुर सड़क पार कर नयांबस्ती होते हुए कोहलपुर तक करीब 16.5 किलोमीटर मार्ग का सर्वे किया था।
पुरैनी में बनना था जंक्शन
प्रस्तावित योजना में सिंगल लाइन रेलमार्ग का प्रावधान था। रुपईडीहा से करीब आठ किलोमीटर की दूरी पर पुरैनी में जंक्शन बनाने का प्रस्ताव भी सर्वे के दौरान तैयार किया गया था। तत्कालीन पूर्वोत्तर रेलवे के प्रमुख अभियंता राम जनम ने प्रारंभिक सर्वे नक्शे और रिपोर्ट जिला प्रशासन कार्यालय बांके तथा रेलवे विभाग, काठमांडू को सौंपी थी। रिपोर्ट मिलने के बाद जिला प्रशासन कार्यालय बांके ने प्रस्तावित रेल लाइन के लिए आवश्यक जमीन का मूल्य भी निर्धारित किया था। यह दर प्रति कट्ठा पांच लाख से 60 लाख रुपये थी। इसके बावजूद परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
भारत-नेपाल व्यापार और पर्यटन को मिलेगी गति
नेपालगंज उद्योग वाणिज्य संघ के पूर्व अध्यक्ष श्रेष्ठ ने सरकार से रेल लाइन विस्तार का काम तत्काल शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि रेल संपर्क बनने से भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में व्यापार, आवागमन और पर्यटन को नई गति मिल सकती है। रुपईडीहा में वर्ष 1886 में रेलवे सेवा शुरू हुई थी। अब करीब 137 वर्ष पुराने इस रेल संपर्क को नेपाल के कोहलपुर तक आगे बढ़ाने की मांग फिर जोर पकड़ रही है।