रिसिया (बहराइच)। सराफा की दुकानों से चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार कर इनके कब्जे से डेढ़ किलो चांदी और तीन ग्राम सोने के जेवरात समेत नकदी बरामद की गई है। गिरोह के सदस्यों ने प्रदेश के कई जनपदों में चोरी की वारदात को अंजाम दिए जाने की बात स्वीकार की है। इस गिरोह के सरगना ने पुलिस के बढ़ते दबाव के चलते नेपाल को अपना ठिकाना बना लिया था।
रिसिया थाना अंतर्गत नरसिंहडीहा बाजार में व्यवसायी महेश कुमार सोनी की सराफा की दुकान का शटर और तिजोरी तोड़कर चोरों ने काफी माल पार कर दिया था। पुलिस के साथ ही एसओजी की टीम घटना के खुलासे में जुटी हुई थी। एसओजी प्रभारी मधुपनाथ मिश्रा और प्रभारी निरीक्षक रिसिया प्रेमप्रकाश पांडेय टीम के साथ घटना के खुलासे में जुटे हुए थे। इसी बीच चोरों के गिरोह के सुजातपुर स्थित आसामरोड फ्लाईओवर के पास मौजूद होने की सूचना मिली।
इस पर पुलिस टीम ने मौके पर दबिश देकर गिरोह के सरगना पयागपुर के रुकनापुर गांव निवासी अजय कुमार लोनिया उर्फ भोंदू के साथ उसके साथी राजेश चौहान, बबलू चौहान, रामकृपाल चौहान, दिनेश चौहान उर्फ कालिया, चुनमुन चौहान और नौरंगी चौहान को पकड़ लिया गया। तलाशी के दौरान चोरों के पास से तिजोरी तोड़ने के लिए प्लास, पेंचकस, लगभग डेढ़ किलो चांदी के जेवरात, तीन ग्राम सोने के जेवरात, पांच हजार रुपये और तीन बाइक बरामद र्हुइं। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि गिरोह ने गोंडा के साथ ही श्रावस्ती, बहराइच, बस्ती आदि जनपदों में चोरी की वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की है। इन सभी चोरों का आपराधिक इतिहास भी खंगाला गया है।
आरोपियों के खिलाफ कई जनपदों में दर्ज हैं मुकदमे
एसओजी प्रभारी मधुपनाथ मिश्रा ने बताया कि चोरों के गिरोह के सदस्यों पर जिले के नवाबगंज, रामगांव, कोतवाली नगर, नानपारा, रिसिया, पयागपुर, कोतवाली देहात समेत अन्य थानों में मुकदमे दर्ज हैं। वहीं बस्ती के कप्तानगंज, वाल्टरगंज, कलवारी, श्रावास्ती के मल्हीपुर और इकौना, गोंडा के कोतवाली नगर और कटरा बाजार में भी कई मुकदमे दर्ज हैं।
नेपाल के पिपरहवा को बनाया था ठिकाना
प्रभारी निरीक्षक प्रेम प्रकाश पांडेय ने बताया कि गिरोह के सरगना अजय लोनिया से कड़ी पूछताछ की गई, जिसमें उसने स्वीकार किया कि वह जिले में पुलिस के बढ़ते दबाव के कारण नेपाल में छिप गया था। नेपाल के बांके जिला अंतर्गत थाना कोहलपुर के पिपरहवा को उसने अपना ठिकाना बना लिया था। गिरोह के सदस्य चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद वहीं छिप जाते थे।