बहराइच। मासूम के साथ दुष्कर्म के आरोप में सुजौली निवासी युवक को बुधवार को विशेष न्यायाधीश पाक्सो की कोर्ट ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर दो लाख 40 हजार का अर्थदंड भी लगाया है।, जिसे अदा न करने पर दस माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने मासूम से दुष्कर्म के मामले में तीसरी बार दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
पीड़िता की मां ने थाना सुजौली में तहरीर देकर बताया था कि उसकी आठ वर्षीय बेटी 25 जून 2025 की शाम घर के बाहर खेल रही थी। इस दाैरान वह अचानक कहीं गायब हो गई।
बेटी को खोजने का काफी प्रयास किया गया, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चल सका। पीड़िता मां ने थाने पर तहरीर देकर गांव निवासी अविनाश पांडेय उर्फ सिंपल पर बेटी के अपहरण करने का आरोप लगाते हुए बेटी को तलाशने और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
मां की तहरीर पर सुजौली पुलिस ने अपहरण, दुष्कर्म समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना पूरी की। आरोप पत्र 25 अगस्त को कोर्ट में सौंपा । बुधवार को विशेष न्यायाधीश पाक्सो दीपकांत मणि की कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई।
इस दौरान अभियोजन पक्ष ने अपनी दलील देते हुए कहा कि घटना गंभीर प्रवृत्ति की है। आरोपी अबोध बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने का अभ्यस्त अपराधी बन चुका है। इसको अधिक से अधिक सजा दी जाए।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद घटना को गंभीर बताते हुए आरोपी अविनाश को घटना का दोषी करार देते हुए बुधवार को तीसरी बार आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए जुर्माना लगाया है।
मासूम बच्चिों से दोषी अविनाश को इसी अदालत में 25 सितंबर को छह साल की मासूम के साथ एवं 27 सितंबर को पांच साल की मासूम के साथ दुष्कर्म का दोषी पाया गया था। इन दोनों मामलों में भी उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। यह जिले के साथ प्रदेश का भी दुर्लभ मामला हो गया है, जिसमें आरोपी को लगातार तीसरी बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
बहराइच में लगातार हो रहे दुष्कर्म के मामले पर प्रदेश सरकार भी गंभीर हुई थी। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से आरोपी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पता चला था कि अविनाश बच्चिों को टाॅफी और चाॅकलेट के बहाने अपने साथ ले जाता था। किसी सुनसान जगह पर ले जाकर उनसे दुष्कर्म करता था।
इसके बाद उन्हें नहलाकर घर के पास ही छोड़ जाता था। इस बीच वह बच्चियों को धमकाता था कि किसी से कुछ बताया तो जान से मार दिया जाएगा। इसी डर से सहमी बच्चियां किसी से कुछ नहीं बताती थीं। इसी तरह तीसरे मामले में पीड़िता ने अविनाश की पहचान कर ली। पुलिस उसके हाथ पर बने टैटू के माध्यम से मामले को सुलझाने में सफल रही।