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Bahraich News: ट्रेन देख ट्रैक पर दौड़ा मासूम, बचाने दौड़ी मां भी चपेट में आई, दोनों की मौत

Sun, 01 Jun 2025 12:57 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
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बहराइच में बख्शीपुरा नईबस्ती जाने वाले मार्ग पर मां व बेटे की ट्रेन की चपेट में आने से मौत के ब
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बहराइच। मोहल्ला बक्शीपुरा नई बस्ती निवासी रोशनी गुप्ता (25) शनिवार की शाम खरीदारी करने बेटे दिव्यांश गुप्ता (04) के साथ बाजार गई थीं। वहां से लौटते समय दोनों ट्रेन की चपेट में आ गए और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। मौत की सूचना से परिजनोंं में कोहराम मच गया। इस दौरान भारी संख्या में मोहल्ले के लोग मौके पर पहुंचे और तनाव की स्थिति बन गई। सूचना पर पहुंची जीआरपी जांच में जुटी रही।
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प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गोंडा की ओर से डेमो ट्रेन आ रही थी। ट्रेन देख रोशनी बेटे दिव्यांश के साथ ट्रैक किनारे खड़ी हो गई थी। लेकिन ट्रेन पास आने पर बेटा दिव्यांश अचानक ट्रैक की ओर दौड़ पड़ा। उसे बचाने के लिए रोशनी भी पीछे से दौड़ी। रोशनी बेटे का हाथ पकड़ कर उसे खींच पाती उससे पहले ही दोनों ट्रेन की चपेट में आ गए। ट्रेन का धक्का लगने से दोनों दूर जा गिरे और उनकी मौत हो गई। जीआरपी थाना प्रभारी दिनेश कुमार पांडेय ने बताया कि शवों को मेडिकल कॉलेज लाया गया है। विधिक कार्रवाई जारी है।
रेल विभाग की संवेदनहीनता ने ले ली मां बेटे की जान

रेलवे विभाग की संवेदनहीनता व जनहित की मांगों की अनदेखी ने शनिवार की शाम एक अबोध बच्चे व उसकी मां की जान ले ली। बंद की गई रेलवे क्राॅसिंग संख्या 41सी से शनिवार शाम को रेल की पटरी पार कर रही महिला तथा एक बच्चा डेमो ट्रेन की चपेट में आ गया। मौके पर ही दोनों की जान चली गई।
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रेलवे ने यह क्रॉसिंग और रेल पटरी पार करने के वैकल्पिक मार्ग को भी बंद कर दिए थे। आसपास के लोगों ने हो रही असुविधा को लेकर कई बार गुहार लगाई, लेकिन यह अनसुनी की जाती रही। रेलवे के अधिकारी नजदीक स्थित गोंडा रेलवे क्रॉसिंग का इस्तेमाल करने को कहते रहे। लेकिन, गोंडा रेलवे क्रॉसिंग भी बीते कई माह से आरओबी निर्माण के कारण बंद है। ऐसे में बख्शीपुरा नई बस्ती के लोग अपनी जान जोखिम में डालकर रेल पटरी फांदकर आते-जाते रहे।
बख्शीपुरा नई बस्ती निवासी अरुण कुमार मिश्र बताते हैं कि इस क्राॅसिंग को खुलवाने के लिए मोहल्ला वासियों ने कई बार प्रदर्शन किया। सांसद, सदर विधायक और डीआरएम व रेल मंत्रालय तक क्राॅसिंग खोले जाने या अंडरपास बनवाने की फरियाद की। लेकिन, रेलवे इन मांगों के प्रति गंभीर नहीं रहा। यहां तक जान जोखिम में डालकर पटरी पार कर रहे लोगों को रोकने का भी कोई प्रयास नहीं किया गया। रेलवे की उदासीनता से शनिवार को दो लोगों की जान चली गई। इन दो जिंदगियों के खत्म होने के बाद क्या रेल विभाग क्राॅसिंग खोलने या अंडरपास बनवाने पर विचार करता है या नहीं।
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