भरथापुर स्थित कौड़ियाला नदी में ग्रामीणों से भरी नाव पलटने के बाद दूसरे दिन बृहस्पतिवार को तला
बहराइच। भरथापुर नाव हादसे की काली रात सिर्फ दर्द की नहीं, बल्कि जिंदगी की उम्मीद और साहस की मिसाल भी बन गई। बिजली का नामोनिशान नहीं था। लगातार बारिश हो रही थी। नदी उफनाई थी, फिर भी एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, एसएसबी, पीएसी और स्थानीय पुलिस के जवान बिना रुके राहत और बचाव कार्य में जुटे रहे।
बुधवार शाम करीब 6:30 बजे जब आखिरी बार ग्रामीणों ने नाव को पलटते देखा, तब से लेकर भोर चार बजे तक टॉर्च, मोबाइल की रोशनी और गाड़ियों के हेडलाइट्स के सहारे जवान नदी में उतर कर लोगों को तलाशते रहे। घुप्प अंधेरे और तेज बहाव के बीच हर आवाज, हर छपाक उम्मीद जगाती रही कि शायद कोई अब भी जिंदा मिल जाए।
ग्राम प्रधान इकरार अंसारी ने बताया कि कुछ जवान रस्सियों के सहारे नदी में उतरे, जबकि बाकी किनारे से लाइट फ्लैश कर रास्ता दिखाते रहे। बारिश और फिसलन के बावजूद किसी ने हार नहीं मानी। कई बार तेज धारा में फंसे मलबे से आवाजें आईं और हर बार जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर उस ओर दौड़ लगाई।
मुश्किल हालात में ग्रामीण भी टीम के साथ कंधे से कंधा मिलाटकर डटे रहे। गांव की महिलाओं ने टीम के लिए खाना, चाय और अन्य जरूरत की चीजें पहुंचाकर मदद कीं। पूरा गांव टीम के साथ मुस्तैद रहे। सभी अपनों की जिंदगी के लिए पूरी रात जूझते रहे।