राजीचौराहा/तेजवापुर। कतर्निया के जंगल से भटक कर आया तेंदुआ रविवार रात पेड़ से तो उतर गया लेकिन वह सरयू के कछार में गन्ने के खेतों में छिपा है। सोमवार सुबह तेंदुए को देखकर खेत जा रहे तीन ग्रामीणों ने भागकर जान बचाई।
देर शाम तक वन विभाग की टीमें कांबिंग करती रहीं लेकिन तेंदुआ नहीं मिला। इससे 10 गांवों के लोग दहशत में हैं। खेतों के पास पूरे दिन रह-रह कर हांका लगता रहा। वनाधिकारियों का कहना है कि तेंदुए को कछार के रास्ते वापस जंगल की ओर खदेड़ने के प्रयास हो रहे हैं।
बहराइच वन प्रभाग के महसी रेंज अंतर्गत रमपुरवा उदुवापुर गांव सरयू के कछार के पास है। गांव से नदी की दूरी महज दो किलोमीटर है। सरयू नदी 16 किलोमीटर चलकर घाघरा में जुड़ती है, जबकि घाघरा नदी कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के किनारे से होकर बहती है।
माना जा रहा है कि नदी के कछार से होकर कतर्नियाघाट का तेंदुआ भटक कर बहराइच में आबादी के निकट पहुंच गया। रविवार को तेंदुए ने पेड़ पर चढ़कर पूरे दिन वनकर्मियों को छकाया। देर रात वह पेड़ से उतरकर खेतों में गुम हो गया।
सोमवार सुबह सरयू नदी के निकट गन्ने के खेत के पास जा रहे उदुवापुर निवासी झब्बर, राममिलन और मंगरे को तेंदुआ दूर से दिखाई पड़ा। इस पर सभी ने शोर मचाना शुरू किया और उल्टे पांव घर की ओर भागे।
सूचना पाकर वन विभाग की टीम अशोक कुमार और प्रताप सिंह राना की अगुवाई में मौके पर पहुंची। सुबह से शुरू की गई कांबिंग देर शाम तक चली लेकिन तेंदुए का सुराग नहीं लग सका।
इस बीच कपूरपुर और कदियापुर गांव केलोगों ने गन्ने के खेत के पास तेंदुए जैसा जीव देखने की पुष्टि की। दहाड़ की आवाज सुनने की भी बात बताई।
वन क्षेत्राधिकारी रुस्तम परवेज ने बताया कि कभी-कभी पानी और भोजन की तलाश में तेंदुए जंगल से भटक कर मैदानी इलाकों में पहुंच जाते हैं। हो सकता है यह तेंदुआ भी इसी तरह आ गया हो।
उन्होंने कहा कि निरंतर कांबिंग चल रही है। ऐसे में सरयू और घाघरा के कछार के रास्ते तेंदुआ वापस जंगल की ओर चला जाएगा।