कैसरगंज। गन्ना एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है और वैज्ञानिक खेती के जरिए किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। यह बात देवीपाटन (गोंडा) के उप गन्ना आयुक्त, आरबी राम ने एक किसान गोष्ठी के दौरान दी।
ग्राम सभा मंझारा तौकली और गोड़हिया में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन पारले कंपनी के उप मुख्य गन्ना प्रबंधक संजीव राठी ने किया। गोष्ठी में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसएन सिंह और डॉ. बीडी सिंह ने किसानों को आधुनिक खेती के गुर सिखाए।
बताया कि मिट्टी के उपचार के लिए ट्राइकोडर्मा और जैविक खाद का प्रयोग करें। दो आंख वाले ताजे बीजों को पत्तियों सहित लगाएं। उर्वरकों का संतुलित उपयोग सीधे नालियों में करें। ट्रेंच विधि से बोआई करते समय दो लाइनों के बीच कम से कम चार फीट की दूरी जरूर रखें।
पुरानी या अस्वीकृत किस्मों को छोड़कर नई और स्वीकृत प्रजातियां जैसे 15023, 0118, 14201, 18231, 16202, 94184, 15466 और 98014 अपनाएं। वैज्ञानिकों ने कहा कि गन्ने की खेती अब केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि एक मुनाफे वाला व्यवसाय है। किसानों से अपील की गई कि वे पैदावार बढ़ाने के लिए खेती में मशीनीकरण को बढ़ावा दें।