बहराइच। शासन ने पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने के तीन दिन बाद जिला पंचायत अध्यक्ष के आरक्षण के पत्ते खोल दिए। इसके बाद पंचायत के चुनावी रण में कई सूरमा ढेर नजर आ रहे हैं।
आरक्षण में जिले की सीट को अनुसूचित जाति के पाले में फेंके जाने के बाद बहराइच के एक कद्दावर मंत्री व वर्तमान जिपं अध्यक्ष के चुनावी मोहरे भी चित हो गए हैं।
मोदी लहर में दो साल पहले जीत का सपना संजोए एक पूर्व अध्यक्ष ने भगवा झंडा उठा लिया था। उनके सपने भी चूर-चूर दिख रहे हैं। अब जिले में धाक बनाने के लिए नए समीकरण तैयार करने में चुनावी रणनीतिज्ञ जुट गए हैं।
बहराइच में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद वर्ष 2005 में अनारक्षित था, जिसमें कैसरगंज के पूर्व विधायक दृगराज सिंह के पुत्र विजय कुमार सिंह अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। इसके बाद वर्ष 2010 में यह पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित हो गया, जिसमें पूर्व अध्यक्ष ने अपनी पत्नी विनीता सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था।
हालांकि, इसमें सपा के उम्मीदवार हाजी इमलाक खां की पत्नी गुलशन को जीत हासिल हुई थी। अबकी बार चुनावी समीकरण पूरी तरह से उलट गए हैं।
बहराइच जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित घोषित करते हुए सरकार ने कई दिग्गजों को मैदान से बाहर कर दिया है। अब राजनीति किस करवट बैठेगी, ये समझने में राजनीतिक पंडितों को छींकें आ रही हैं।
गौरतलब हो कि इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष सीट अपने पाले में करने के लिए एक कद्दावर मंत्री के साथ ही वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपने-अपने मोहरे बिछाए थे, चालें भी चलीं थीं लेकिन जिपं अध्यक्ष का पद आरक्षित किए जाने के बाद अब इसके निहितार्थ तलाशने शुरू कर दिए गए हैं।
सपा के अंदर खाने में माना जा रहा है कि एक पूर्व विधायक की नाराजगी को दूर कर उनको खुश करने के लिए गेम चेंजर प्लान खेला गया है, जबकि दूसरे गुट में दबी जुबान से बात उठ रही है कि पार्टी के अंदर टकराहट की स्थिति को समाप्त करने के लिए आरक्षण पर दांव लगा दिया गया है।
उधर, भाजपा के खेमे में दो साल पहले पूर्व विधायक पिता के साथ विजय सिंह के शामिल होने को भी जिला पंचायत चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा था। हालांकि, वह भी मैदान से बाहर हो गए हैं लेकिन अभी भी भगवा खेमे के सूरमाओं ने हिम्मत नहीं हारी है।
किस तरह से चुनावी अखाड़े में मुकाबला किया जाए, इसकी रणनीति बन रही है। वर्तमान सांसद के निकटतम माने जाने वाले जहां दावेदारी प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं भाजपा के पूर्व मंत्री के खेमे में भी तैयारियां चल रही हैं। हालांकि कांग्रेसी खेमे में अध्यक्ष चुनाव को लेकर कोई हलचल नहीं नजर आ रही है।