बहराइच। सरयू का पानी तो घट रहा है, लेकिन कटान ने रफ्तार पकड़ ली है। एल्गिन ब्रिज पर 24 घंटे में 20 सेमी जलस्तर कम होने के बाद भी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। महसी के महंतपुरवा गांव के पास नदी ने कहर बरपा रखा है। रातभर में 38 बीघा उपजाऊ खेत धारा में समा गए। बाढ़ से उबरते ही अब ग्रामीण कटान और बीमारी की मार झेल रहे हैं, जबकि प्रशासन की ओर से राहत के नाम पर सिर्फ कागजी रिपोर्टें बनाई जा रही हैं।
नदी का जलस्तर लगातार कम हो रहा है, केंद्रीय जल आयोग की स्थानीय इकाई के मुताबिक रविवार सुबह नौ बजे एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर 106.19 मीटर दर्ज हुआ। यह खतरे के निशान से 12 सेमी अधिक है। वहीं चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज से 3.10 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। इसके साथ ही कटान की रफ्तार भी तेज हो गई है। खेत और फसलें नदी की भेंट चढ़ने लगी हैं।
महसी तहसील के महंतपुरवा गांव के पास कटान तेज हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार शनिवार रात से रविवार शाम तक करीब 38 बीघा उपजाऊ खेत नदी में समाहित हो चुका है। तेज कटान की वजह से किसानों की मेहनत और सालभर का सहारा बर्बाद होता दिख रहा है।
मांझा दरियाबुर्द, प्रधानपुरवा, चरीगाह समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी उतर चुका है, मगर गलियों और सड़कों पर जलभराव बना हुआ है। इससे ग्रामीणों की दिनचर्या प्रभावित है, संक्रामक रोग फैलने लगे हैं।
ग्रामीण राम फेरन का कहना है, हम लोग रोज दहशत में जी रहे हैं। खेत नदी में समा रहे हैं और मदद के नाम पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। गांव के ही शिवबालक ने बताया कि बाढ़ का पानी तो खिसक गया है, लेकिन अब कटान जानलेवा साबित हो रहा है। फसल पूरी तरह बर्बाद हो रही है।
चरीगाह गांव निवासी शंकरलाल का कहना है कि रास्तों पर अभी भी पानी भरा है। आने-जाने में मुश्किल हो रही है। बच्चों की पढ़ाई और दिनचर्या प्रभावित है। प्रधानपुरवा के रामकुमार ने बताया कि पानी घटते ही बीमारी का खतरा बढ़ गया है। बुखार और दस्त के मरीज बढ़ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कोई सक्रियता गांव में नहीं दिख रही है।