बहराइच। नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। नेपाल के पहाड़ों तराई में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते जिले की दोनों प्रमुख नदियां उफान पर हैं। सरयू एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 40 सेमी ऊपर बह रही है, जबकि महसी तहसील के घूरदेवी इलाके में भी नदी खतरे के निशान से 18 सेमी ऊपर पहुंच चुकी है। करीब 33 गांवों में पानी घुस गया है। खेत-खलिहान डूब चुके हैं, घरों में पानी भर गया है। ग्रामीण मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटक रहे हैं।
प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस राहत और बचाव कार्य शुरू नहीं किया गया है, जिससे लोगों में नाराजगी है। बाढ़ चौकिया बंद पड़ी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल यही हाल होता है, लेकिन प्रशासन सिर्फ निरीक्षण और आश्वासन तक ही सीमित रहता है।
जिले में बारिश का क्रम थम नहीं रहा है। नेपाल के पहाड़ों पर भी मूसलाधार बारिश हो रही है। इसके चलते शारदा, गिरिजापुरी और गोपिया बैराज पर नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच गया है। तीनों बैराजों से बुधवार दोपहर से 3 लाख 36 हजार 174 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
इस वजह से एल्गिन ब्रिज पर सरयू खतरे के निशान से 106.07 के सापेक्ष 106.490 मीटर पर बह रही है, जबकि महसी तहसील के घूर देवी पर नदी का जलस्तर 112.320 मीटर रिकॅार्ड किया गया। यहां नदी के खतरे का निशान 112.135 मीटर है।
नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण मिहींपुरवा की जंगल गुलरिया ग्राम पंचायत के धरमपुर रेतिया, रामपुर रेतिया और सम्पत पुरवा तथा ग्राम पंचायत सुजौली के खैरी पुरवा, टिलवा, मुजवा समेत 13 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
महसी तहसील के गांवाें में पानी का बहाव अधिक होने से जानकीनगर और पूरे प्रसाद गांव का संपर्क जिला व तहसील मुख्यालय से कट गया है। महसी के साथ कैसरगंज तहसील के तटवर्ती गांवों में भी लोग बाढ़ की विभीषिका का सामना कर रहे हैं। ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की तलाश में परिवार और मवेशियों के संग भटकने के लिए मजबूर हैं। अब तक ग्रामीणों को समुचित राहत सहायता मुहैया नहीं हो सकी है।
बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों ने प्रशासन से तुरंत राहत शिविर खोलने, भोजन, पानी और दवाइयों की व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक न कोई नाव भेजी गई है, न कोई मेडिकल टीम पहुंची है।
डीएम ने किया गेज स्टेशन का निरीक्षण, दिए सतर्कता बढ़ाने के निर्देश
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने घाघराघाट स्थित केंद्रीय जल आयोग के गेज स्टेशन और बाढ़ चौकी का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद उपजिलाधिकारी कैसरगंज अखिलेश कुमार सिंह से बाढ़ की स्थिति, जलस्तर, राहत कैंपों और सुरक्षा इंतजामों की जानकारी ली। निर्देश दिया कि अधिकारी क्षेत्र में भ्रमणशील रहते हुए हर संवेदनशील स्थान की निगरानी करें और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर तैयार रहें। उन्होंने जिला कंट्रोल रूम में फोन कर कर्मचारियों की उपस्थिति की जानकारी ली और बाढ़ चौकी में दवाओं और चिकित्सा स्टाफ की उपलब्धता की भी समीक्षा की।
सुरक्षा के मोर्चे पर भी अलर्ट
पुलिस क्षेत्राधिकारी रवि खोखर और सिंचाई विभाग के अधिकारियों से नदी की दिशा, तटबंधों की स्थिति और डैम से छोड़े जा रहे पानी की जानकारी ली गई। डीएम ने तटबंधों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने और संवेदनशील जगहों पर सतर्क रहने के निर्देश दिए।
बाढ़ में बह गए 10 परिवारों के आशियाने, झुंडी गांव का रास्ता भी कटा, लगानी पड़ी नाव
शिवपुर। ग्राम पंचायत चौकसाहार के मजरा झुंडी में मंगलवार को नदी के तेज बहाव ने 10 परिवारों के घर उजाड़ दिए। फूस से बने ये घर नदी के कटान में बह गए। जिन लोगों के घर बाढ़ में उजड़े हैं, उनमें नंदराम, ओंकार, रुद्रसेन, शिवराम, सीता देवी, भीखू, त्रिभवन, सर्वेश, सुग्रीव और प्रदीप शामिल हैं। अब ये परिवार सिर पर छत के लिए सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं। नदी के तेज कटान के कारण झुंडी का मुख्य मार्ग भी पूरी तरह कट गया है, जिससे गांव का संपर्क टूट गया है। प्रशासन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नाव लगाई गई है, ताकि लोग जरूरी काम के लिए आ-जा सकें। लोगों की मांग है कि जल्द राहत सामग्री और सुरक्षित जगह की व्यवस्था की जाए, ताकि बचे हुए लोग भी सुरक्षित रह सकें।