बहराइच। हजरत इमाम हुसैन व 72 शोहदाए कर्बला की शहादत के 40 दिन पूरा होने पर गुरुवार को नगर में चेहल्लुम का जुलूस निकाला गया। अलविदाई मजलिस के बाद दुलदुल के साथ जुलूस में शामिल लोगों ने नौहाख्वानी करते हुए मातम किया।
शहर में पिछले 79 सालों से चेहल्लुम का जुलूस निकाला जा रहा है। गुरुवार सुबह दस बजे अजाखाना-ए-मोहसनिया में एक अलविदाई मजलिस हुई, जिसे मौलाना सैय्यद मेंहदी रिजवी ने संबोधित किया। उन्होंने इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की इंसानियत के लिए शहादत का वाकया बयां किया तो लोग सिसक उठे।
मजलिस के समापन के बाद अलम ताबूत व दुलदुल का जुलूस दुलदुल हाउस से बरामद किया गया। इसमें स्थानीय अंजुमनों ने नौहाख्वानी करते हुए मातम किया। जुलूस में शामिल अंजुमने नौहा पढ़ती हुई आगे बढ़ रही थीं।
जिया रिजवी ने बताया कि चेहल्लुम का जुलूस पहली बार वर्ष 1936 में मीर अहसन मेंहदी ने निकाला था। इनके निधन के बाद मीर अबु जाफर ने यह परंपरा कायम रखी, जो दुलदुल हाउस से निकलकर अमीरमाह गया। इसके पश्चात यह जुलूस कर्बला पहुंचकर समाप्त होने लगा।
कर्बला में जुलूस की समाप्ति पर फिर से मजलिस हुई। इस मजलिस को फैज अब्बास जैदी ने खिताब किया। जुलूसे काफिलाए बनी असद व शबीहे ताबूत हजरत इमाम हुसैन बरामद हुआ। इस ताबूत की जियारत करने के लिए कर्बला में तमाम लोग मौजूद रहे। इस दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही।