बहराइच। दामाद-ए-पैगंबर हजरत अली की याद में 19वीं रमजान पर मंगलवार को नगर में परंपरागत तरीके से भोर में जुलूस निकाला गया। जिसमें लोग मातम करते हुए शामिल हुए।
इस मौके पर मजलिस हुई। हजरत अली की शहादत वाकया सुनाए जाने पर माहौल गमगीन हो उठा।
गौरतलब हो कि 1400 वर्ष पूर्व इराक स्थित मस्जिद-ए- कूफा में 21वीं रमजान के दिन सुबह नमाज अदा करते समय दामाद-ए-पैगंबर हजरत अली की शहादत हुई थी।
उसी की याद में जिले में 19वीं रमजान से मजलिस और जुलूस का सिलसिला शुरू होता है। 21वीं रमजान को समापन होता है।
इसी के तहत मंगलवार भोर में 19वीं रमजान के मौके पर सुबह पांच बजे सैय्यदबाड़ा स्थित शिया जामा मस्जिद से जुलूस निकाला गया।
यह जुलूस परंपरागत मार्गों से होते हुए सैय्यद सगीर इमाम रिजवी उर्फ सरवर के घर पहुंचकर समाप्त हुआ। यहां मजलिस हुई। जिसे सैय्यद सगीर आबिद रिजवी ने संबोधित किया।
मजलिस में फरहत हुसैन ने नौहा पढ़ा अली ने सजदा-ए-खालिक में तेग खायी है, जहां में कब्ल कयामत कयामत आई है। यह सुनकर मजलिस में मौजूद लोग सिसक उठे।