बहराइच। विजयदशमी पर भगवान राम से युद्ध करने से पहले रावण शहर के सिद्धनाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना करेगा। इसके बाद भव्य जुलूस के साथ रामलीला मैदान तक पहुंचेगा।
दूसरी ओर श्रीराम भी अपनी सेना के साथ रामलीला मैदान में पहुंचेंगे। यहां दोनों अपने पराक्रम का परिचय देंगे और अंतत: अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय होगी। श्रीराम के हाथों रावण वीरगति को प्राप्त होगा।
असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक विजयदशमी की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। रामलीला मैदान में मंचन के दौरान राम-रावण के युद्ध का मंचन न सिर्फ रोमांचकारी रहेगा, बल्कि परंपरा को सहेजते हुए सभ्यता और संस्कृति की भी याद दिलाएगा।
रामलीला मैदान में राम-रावण युद्ध का मंचन शाम को शुरू होगा। इससे पहले दोपहर में रावण अपने बेटे मेघनाद व भाई कुंभकर्ण तथा सैनिकों के साथ सिद्धनाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना करेगा।
इसके बाद यहां से रावण की सेना का भव्य जुलूस निकाला जाएगा। यह जुलूस घंटघर, चांदपुरा, मिशन अस्पताल होते हुए रामलीला मैदान पहुंचेगा। यहां श्रीराम-रावण युद्ध का मंचन शुरू होगा।
श्री मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित बारह दिवसीय रामलीला के तहत 42 फीट रावण का पुतला बनाने में कारीगर जुटे हुए हैं। समिति अध्यक्ष श्यामकरन टेकड़ीवाल ने बताया कि गुरुवार सुबह तक रावण का पुतला तैयार हो जाएगा।
भगवान राम से युद्ध के दौरान रावण हंसने के साथ भगवान राम से वाकयुद्ध भी करेगा। इसके लिए पुतले में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाए जाएंगे। रावण के पुतले का निर्माण करने वाले नाजिरपुरा निवासी पप्पू ने बताया कि पुतले के निर्माण में सात दिन से पांच कारीगर जुटे हैं।