बहराइच। खाद बेचने के लिए यदि आपको लाइसेंस चाहिए तो विज्ञान या कृषि की स्नातक डिग्री होना अनिवार्य है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने उर्वरक (नियंत्रण) आदेश में संशोधन कर दिया है।
केंद्र सरकार ने शासनादेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब सिर्फ उन्हीं लोगों को खाद बिक्री का लाइसेंस दिया जाएगा, जिनके पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कृषि या रसायन विज्ञान में स्नातक या कृषि में डिप्लोमा की योग्यता है। जिला कृषि अधिकारी ने शासनादेश को अमली जामा पहनाने के लिए कवायद शुरू कर दी है।
34.75 लाख की आबादी के सापेक्ष जिले में साधन सहकारी समिति की 111 दुकानें, निजी सेक्टर की 740 उर्वरक दुकानें संचालित हैं। इसके अलावा पीसीएफ की दो, एग्रो व इफ्को की तीन-तीन और होफेड की 15 दुकानें स्थापित हैं।
खाद की बिक्री का अधिकार पत्र जिला कृषि अधिकारी जारी करता है। अभी तक विभाग से अनपढ़ों को भी खाद की बिक्री का लाइसेंस मिल जाता था लेकिन अब केंद्र सरकार के अधीन कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने अनिवार्य वस्तु अधिनियम, 1955 (1955 का 10) की धारा तीन द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 में संशोधन कर दिया है।
यह उर्वरक नियंत्रण आदेश का चौथा संशोधन है। अब किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से कृषि में विज्ञान स्नातक या रसायन में विज्ञान स्नातक या कृषि में डिप्लोमा धारी को छोड़कर किसी अन्य को खाद बिक्री का लाइसेंस नहीं दिया जाएगा।
इसके अलावा राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान, राष्ट्रीय पादप स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान और अन्य सरकार द्वारा अनुमोदित संस्थानों से न्यूनतम छह माह की अवधि का कृषि इनपुट में प्रमाण पत्र होना अनिवार्य कर दिया गया है। कृषि विभाग ने लाइसेंस के आवंटन में नवीन व्यवस्था लागू कर दी है।
गुणवत्ता सुधरेगी
नए नियमों से खाद की गुणवत्ता व अभिलेखों को दुरुस्त रखने प्रक्रिया में निखार आने की संभावना जताई जा रही है। लाइसेंस धारक को बिक्री के अभिलेखों को दुरुस्त करना पड़ता है लेकिन जिले में ऐसे तमाम लाइसेंस धारक हैं जो अनपढ़ हैं। इससे महकमे को कठिनाई आती है।
अब यदि पढ़े लिखे लोगों को लाइसेंस जारी होगा तो अभिलेख भी दुरुस्त रहेंगे। वहीं किसानों को भी खाद की गुणवत्ता समझाने व अन्य खेती-पाती की जानकारी देने में सहूलियत रहेगी।
पुराने लाइसेंस में फेरबदल नहीं
जिला कृषि अधिकारी डॉ अश्विनी कुमार ने बताया कि नए शासनादेश जारी होने से पूर्व जिन आवेदकों को खाद बिक्री अधिकार पत्र जारी हो चुके हैं, उन पर यह आदेश नहीं लागू होगा। हालांकि, समय पर उन्हें रिनीवल कराना अनिवार्य है।
लेटलतीफी पुरानें लाइसेंस धारियों पर भारी पड़ सकती है। यह शासनादेश कृषि सहकारी संस्थाओं और राज्य विपणन परिसंघों पर भी लागू नहीं होगा। अब कृषि या विज्ञान रसायन वर्ग की पात्रता रखने वाले लोगों को ही लाइसेंस दिया जाएगा।