बहराइच। दुष्कर्म जैसी गंभीर शारीरिक व मानसिक वेदना से पीड़ित महिलाओं को आर्थिक मदद के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। बजट के अभाव में इनके दर्द पर मरहम नहीं लग पा रहा है। शासन की ओर से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार उत्पीड़न योजना के तहत दुष्कर्म पीड़िताओं को आर्थिक सहायता दिए जाने का प्राविधान है। बीते एक अप्रैल से अगस्त माह तक जिले में 45 ऐसे प्रकरण सामने आए हैं। इसमें से 23 पीड़िताओं को शासन द्वारा अनुमन्य सहायता राशि उपलब्ध करा दी गई है, लेकिन 22 मामलों में बजट का अभाव पीड़िताओं की मदद में बाधक बन रहा है। इन पीड़िताओं की मदद के लिए शासन द्वारा 82.50 लाख रुपये की धनराशि आवंटित किए जाने का इंतजार किया जा रहा है।
दुष्कर्म पीड़िताओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग के पास है। विभागीय आंकड़ों को देखने पर पता चलता है कि बीते वर्ष एक अप्रैल से अगस्त माह तक कुल 45 ऐसे मामले आए। जिइनमें दुष्कर्म पीड़िताओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जानी थी। नियमानुसार दुष्कर्म पीड़िताओं को 3.75 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। विभाग द्वारा 23 दुष्कर्म पीड़िताओं को निर्धारित सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है, 22 पीड़िताएं अभी भी सहायता राशि प्राप्त करने की कतार में हैं। इन पीड़िताओं को सहायता राशि उपलब्ध कराने के लिए 82.50 लाख रुपयों की आवश्यकता है। जिला स्तर पर बजट का आवंटन होने के बाद ही इन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की जा सकेगी।
मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया
दुष्कर्म पीड़िताओं को मुआवजा राशि का भुगतान तीन चरणों में किया जाता है। दुष्कर्म की घटनाओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होने पर कुल 3.75 लाख की धनराशि के सापेक्ष 50 प्रतिशत यानि 1.87.500 रुपये पीड़िता को दिए जाते हैं। दूसरे चरण में आरोप पत्र प्रेषित किए जाने के बाद 25 प्रतिशत के रूप में 93,500 व तृतीय चरण में न्यायालय द्वारा निर्णय होने पर शेष धनराशि के रूप में 93,500 रुपये प्रदान किए जाते हैं।
प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी सहायता
दुष्कर्म पीड़िताओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए बजट का आवंटन कर दिया गया है। इसके तहत लगभग एक करोड़ की धनराशि आवंटित की गई है। एसपी कार्यालय से प्राथमिकता के आधार पर पीड़िताओं की जानकारी प्रदान करने पर सहायता राशि आवंटित की जाएगी।
रविशंकर पांडेय, प्रभारी समाज कल्याण अधिकारी, बहराइच।