बहराइच। एचआईवी/एड्स को लेकर आज भी समाज में कई भ्रांतियां और झिझक बनी हुई है। आशंका होने के बावजूद कई लोग शर्म और डर के कारण जांच या चिकित्सकीय परामर्श लेने से बचते हैं। इससे संक्रमण की पहचान में देरी हो सकती है। लोगों को समय रहते एचआईवी संक्रमण के जोखिम के प्रति जागरूक करने के लिए राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी ने क्यूआर कोड आधारित जोखिम आकलन की व्यवस्था विकसित की है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एमएल वर्मा ने बताया कि एचआईवी/एड्स को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए क्यूआर कोड की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इस क्यूआर कोड को जिले की ग्राम पंचायतों में स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। आम लोग अपने मोबाइल फोन से क्यूआर कोड स्कैन कर एचआईवी संक्रमण से जुड़े जोखिम का आकलन कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें मोबाइल पर खुलने वाले फॉर्म में पूछे गए करीब दस सवालों के जवाब देने होंगे। सभी सवालों के जवाब दर्ज करने के बाद व्यक्ति को उसके जोखिम के संबंध में जानकारी मिल सकेगी।
समय से मिल सकेगा चिकित्सकीय परामर्श
विभाग का उद्देश्य लोगों को एचआईवी संक्रमण के संभावित जोखिम के प्रति जागरूक करना है, ताकि जोखिम की जानकारी मिलने पर वे बिना झिझक समय रहते चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक जांच करा सकें। इससे संक्रमण की स्थिति में समय से पहचान और उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।