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राष्ट्रपति के साथ भोजन करेंगी टेड़िया गांव की भानमती

Tue, 05 Jan 2016 09:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
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बहराइच। हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ चल पड़ेंगे कारवां बन जाएगा। इन शब्दों की जिंदा मिसाल हैं टेड़िया गांव की भानमती।
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भानमती ने 2005 में आधी आबादी के अस्तित्व की रक्षा को संघर्ष की राह पकड़ी और आज वे इस जंग की शिनाख्त बन गई हैं।

भानमती के इस हौसले और जज्बे को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने भी मान्यता दी है। फेसबुक पर करवाई गई वोटिंग में भानमती का नाम देश की सर्वश्रेष्ठ 100 महिलाओं में शामिल किया गया है।

इसी उपलब्धि पर 22 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी भानमती के साथ भोजन करेंगे और उन्हें सम्मान से नवाजेंगे।

मिहींपुरवा विकासखंड के वनग्राम टेड़िया की रहने वाली भानमती (42) को दस साल पहले तक लोग घरेलू महिला के रूप में जानते थे। वह टोकरियों में फल व सब्जी बेचकर या ट्रेन में पल्लेदारी करके परिवार का भरण पोषण करती थीं।
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लेकिन, 2005 में डेढ़ सौ साल से नागरिक हकों से वंचित वनग्राम वासियों के लिए शुरू हुए वनग्राम आजादी आंदोलन में कूद पड़ीं। अनपढ़ होने के बाद भी सीखने व बोलने की क्षमता ने जल्द ही भानमती को एक महिला अगुवाकार की भूमिका में खड़ा कर दिया।

उन्होंने सूचना के अधिकार, नरेगा, मानवाधिकार, महिला अधिकार, बाल अधिकार मुद्दों पर प्रशिक्षण हासिल किया और सक्रिय नेता के रूप में कुव्यवस्थाओं के खिलाफ संघर्ष शुरू किया।

पहली बार क्षेत्रीय कोटेदार के भ्रष्टाचार के खिलाफ 54 आवेदन डाले। आखिरकार प्रशासन को कोटा निरस्त करना पड़ा और जनता को उसका हक दिलवाया। इसमें भानमती को कई यातनाएं भी सहनी पड़ीं पर वे डरीं नहीं।

भानमती वनग्राम अधिकार मंच की अध्यक्ष भी हैं। 10 ग्राम पंचायतों की करीब तीन हजार महिलाओं को लेकर वह संघर्ष कर रही हैं। हाल ही में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने फेसबुक के साथ मिलकर वोटिंग के जरिये महिला हकों की लड़ाई लड़ रहीं महिलाओं को चयनित करने का अभियान शुरू किया।

भारत में हुई वोटिंग के जरिये भानमती की सर्वाधिक सौ शक्तिशाली महिलाओं में चुना गया है। इन महिलाओं को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने 22 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में अपने साथ भोजन के लिए आमंत्रित किया है।
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‘देहात’ ने भानमती को दी बधाई

डेवलेपमेंट एसोसिएशन फॉर ह्यूमन एडवांसमेंट (देहात) के मुख्य कार्यकारी डॉ. जितेंद्र चतुर्वेदी भानमती के संघर्षों में बराबर के साथी रहे हैं। राष्ट्रपति के हाथों को भानमती को मिलने वाले सम्मान पर उन्होंने खुशी जताई है।

उन्होंने कहा कि जिस समुदाय को सशक्त बनाने की मुहिम छेड़ी थी, वह समुदाय पुरस्कृत हो रहा है। यह गौरव का विषय है। भानमती ने जिले का गौरव भी बढ़ाया है।
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