बहराइच। खैरीघाट क्षेत्र में लगातार हमलावर हो रही मादा तेंदुए को अब ट्रैंकुलाइज कर पकड़ा जाएगा। इसे लेकर रविवार रात से कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग से आई हथिनी जयमाला व चंपाकली की मदद से तलाश शुरू कर दी गई। सोमवार को दिन भर किए गए प्रयास से कोई सफलता मिली नहीं। शावकों के साथ गन्ने के खेतों में घूम रही तेंदुआ सोमवार को भी वन टीम की पकड़ से दूर रही।
खैरीघाट थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत चौकसाहार व उसके आसपास के इलाके में बीते कई दिनों से आतंक का पर्याय बनी मादा तेंदुए को पकड़ने के लिए सोमवार को दिन भर जयमाला व चंपाकली की मदद से तलाश की गई। सोमवार को जयमाला व चंपाकली पर बैठे वन कर्मियों ने तेंदुए को ट्रैंकुलाइज करने के लिए कई खेतों की खाक छानी, लेकिन तेंदुए का पता नहीं चल सका।
तेंदुए ने बीते मंगलवार को चौकसाहार के मजरा उपरहिनपुरवा निवासी बालक रोहित व इससे लगभग छह दिन पूर्व चौकसाहार के मजरा झुंडी निवासी किशोरी रामबेटी पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया था। जिसके बाद से बहराइच वन प्रभाग के डीएफओ समेत सभी वनाधिकारी चौकसाहार में कांबिंग कर तेंदुए की तलाश कर रहे थे।
इसी बीच रविवार को चौकसाहार के ग्राम पंचायत डल्ला पुरवा के मजरा तेलियनपुरवा निवासी दो किशोरियों ममता (17) व अनीसा (14) पर तेंदुए ने हमला कर दिया। धान की मड़ाई कर रही सगी बहनों में अनीसा गंभीर रूप से घायल हो गई थी। जिसे सीएचसी में भर्ती करवाया गया।
कुछ दिन बच्चों के साथ खेतों में न जाने की अपील
डीएफओ संजय शर्मा ने बताया कि तेंदुए को पकड़ने के लिए 20 टैपिंग कैमरे, पांच पिंजरे, 20 जाल व ड्रोन की मदद ली जा रही है। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग की हथिनी जयमाला व चंपाकली की मदद से ट्रैंकुलाइज कर पकड़ने का प्रयास भी जारी है। अभी तेंदुआ पकड़ से बाहर है। ग्रामीणों से अपील है कि जब तक तेंदुआ पकड़ी नहीं जाती तब तक बच्चों को खेतों में न भेजें।
उन्होंने बताया कि ग्रामीणों के खेतों में जाने से पैरों के निशान मिट रहे हैं और तलाश में परेशानी हो रही है। हमले का भी खतरा बढ़ जाता है। सोमवार को तेंदुए की तलाश में कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के गिरिजापुरी रेंज के एसडीओ रमेश, डिप्टी रेंजर अमित वर्मा समेत सभी रेंज अधिकारी जुटे रहे।