बहराइच। गर्भवती पत्नी की हत्या के मामले मेें शनिवार को अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम ने पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जबकि दहेज उत्पीड़न आदि के मामले मेें भी पति, सास, ससुर व जेठ को अधिकतम सात साल की सजा सुनाई है।
डीजीसी फौजदारी फिरोज अहमद ने बताया कि थाना रामगांव के किशुनपुर मीठा गांव निवासी सहजराम यादव ने अपनी बहन संगीता देवी का विवाह खैरीघाट के पिपरिया गांव निवासी रंगीलाल से किया था। आरोप है कि दहेज की मांग पूरी न होने पर संगीता की हत्या कर दी गई थी। घटना के वक्त वह गर्भवती थी। मामले में उसके भाई की तहरीर पर पति रंगीलाल यादव, जेठ पैकरमा यादव, सास लज्जावती व ससुर राधेलाल यादव के खिलाफ 21 फरवरी 2014 को खैरीघाट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।
मामला अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम नितिन पांडेय के न्यायालय में चल रहा था। डीजीसी फौजदारी फिरोज अहमद ने बताया कि शनिवार को मामले मेें सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने गर्भावस्था मेें पत्नी की हत्या को जघन्य अपराध करार देते हुए घटना मेें शामिल पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जबकि दहेज उत्पीड़न आदि धाराओं मेें न्यायाधीश ने पति, जेठ, सास व ससुर को तीन से सात साल की सजा सुनाई है। डीजीसी फौजदारी ने बताया कि अभियुक्तों की सभी सजा एक साथ चलेगी।