राजीचौराहा (बहराइच)। बहराइच और सीतापुर को जोड़ने वाले चहलारीघाट पर बना पीपे का पुल रविवार रात अचानक घाघरा में जलस्तर बढ़ने से बह गया।
पुल के छह पीपे निकलकर दो किलोमीटर दूर निकल गए। पुल से होकर प्रतिदिन यात्रा करने वाले तीन हजार आबादी को काफी असुविधा हो रही है। लोगों को अब नाव और स्टीमर का ही सहारा है।
सीतापुर जिले की सीमा बहराइच से सटी है लेकिन सीतापुर पहुंचने के लिए सीधा मार्ग नहीं है। सीमा परिक्षेत्र में घाघरा नदी होने के चलते आवागमन आए दिन प्रभावित रहता है।
बरसात के बाद लोक निर्माण विभाग चहलारीघाट पर पीपे का पुल बनाकर सीतापुर से आवागमन सुगम बनाता है। इस बार भी नवंबर के प्रथम सप्ताह में लगभग 150 मीटर लंबा पुल तैयार हुआ था।
लोगों को इससे काफी सहूलियत थी लेकिन रविवार रात अचानक घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ गया है। इसके चलते पीपे के पुल टूट गया। छह पीपे बहकर दो किलोमीटर दूर निकल गए हैं। अब लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी उन पीपों को लाने की मशक्कत कर रहे हैं।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राकेश कुमार ने कहा कि जलस्तर बढ़ने के चलते पीपे का पुल क्षतिग्रस्त हुआ है लेकिन दो दिन में व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएंगी। शीघ्र ही पुल पर आवागमन बहाल कर दिया जाएगा।
बैराज के गेट खुलने से बढ़ा जलस्तर
चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज के सहायक अभियंता संतराम वर्मा ने बताया कि बैराज की सफाई के लिए इसके सारे गेट 17 नवंबर से 19 नवंबर तक खोले गए थे। इस कारण एक साथ बहुत ज्यादा पानी घाघरा नदी में उतरा, जिससे उसका जलस्तर अचानक बढ़ गया है।
नदी के बीचोबीच स्टीमर खराब होने से 20 लोगों की सांसें अटकीं
घाघरा पार करने के लिए एकमात्र स्टीमर ही सहारा है। चहलारीघाट से सीतापुर की सीमा तक स्टीमर से लगभग छह किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है।
पुल न होने के चलते सोमवार सुबह लोग स्टीमर पर सवार हुए लेकिन नदी के बीचोबीच पहुंचकर स्टीमर का पंखा टूट गया। इसके चलते स्टीमर पर सवार 20 यात्रियों की सांसें अटक गईं।
इन 20 यात्रियों के साथ ही स्टीमर पर 18 बाइकें थीं। किसी तरह मोबाइल से लोगों ने चहलारीघाट संपर्क किया। दो घंटे बाद नाव से पहुंचे नाविकों ने खराब हुए स्टीमर को खींचकर किनारे पहुंचाया। तब लोगों ने राहत की सांस ली।
अभी पुल बनने में एक साल लगेगा
बहराइच और सीतापुर के बीच आवागमन सुगम करने के लिए चार वर्ष से चहलारीघाट पर पुल का निर्माण हो रहा है। अब तक लगभग 80 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। लेकिन, जहां पर पुल बन रहा था, नदी वहां से खिसक कर दो किलोमीटर आगे चली गई है।
ऐसे में छह माह पूर्व आईआईटी रुड़की के अभियंताओं ने दूसरे पुल निर्माण को हरी झंडी दी थी। ऐसे में नदी के बीच एक और पुल बनने के बाद सीतापुर की सीमा में बने पुल को भी आपस में जोड़ा जाएगा। फिर आवागमन दुरुस्त हो सकेगा। इस व्यवस्था में अभी एक साल और लगेगा।