ग्रामीण क्षेत्रों में आमजन सहित पशु-पक्षियों को गर्मी से राहत देने के लिए बनाए गए आदर्श तालाबों का हाल बेहाल है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद लगभग सभी आदर्श तालाब सूखे पड़े हैं। जिनमें पानी भराने की याद न तो ग्राम प्रधानों को आ रही है और न ही प्रशासन को। ऐसी उपेक्षा के कारण शासन की यह महत्वकाक्षी योजना का हाल बेहाल है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत पूर्व में जिले के 334 ग्राम पंचायतों में आदर्श तालाब का निर्माण कराया गया था। जिन पर करीब साढ़े तीन लाख रुपये प्रति तालाब खर्च किया गया था। इन तालाबों के चारों ओर छाया के लिए पौधरोपण, लोगों को बैठने के लिए बेंच, सुरक्षा के लिए कटीले तारों की बाड़ लगाई गई थी।
इसके अलावा पशुओं को आने जाने के लिए रास्ता व लोगों के आने जाने के लिए सीढ़ी का निर्माण कराया गया था। यह योजना शुरुआती दौर में ही अनियमितता की भेंट चढ़ गई। एक तरफ जहां तालाब निर्माण में मानकों की अनदेखी हुई। वहीं सुरक्षा व संरक्षा के अभाव में एक तरफ जहां जलाशयों में चारों ओर लगाए गए कटीले तार चोर निकाल ले गए।
वहीं देखरेख के अभाव में यहा लगाए गए पौध भी सूख गए। जिले में बने अधिकांश तालाब अब पूरी तरह से सूख चुके हैं। जिनमें आज दरार देखी जा रही है। जिसमें पानी भराने की याद न तो ग्राम पंचायत को आ रही है। और न ही प्रशासन ही इस पर ध्यान दे रहा है।