बहराइच। तराई का मौसम बदलने से सर्दी, खांसी, जुकाम व बुखार के मरीज तेजी से बढ़ने लगे हैं। बच्चों में निमोनिया का खतरा भी बढ़ गया है। बाल रोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 200 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। बुधवार को पीआईसीयू व चिल्ड्रन वार्ड में 45 बच्चे भर्ती मिले। 10 बेड वाले पीआईसीयू में 13 बच्चे भर्ती किए गए हैं। इसमें आठ निमोनिया से पीड़ित हैं। डॉक्टर सर्दी से बचने की सलाह दे रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में इन दिनों सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार के ज्यादा मरीज आ रहे हैं। वहीं निमोनिया से पीड़ित बच्चों की संख्या भी बढ़ी है। बुधवार को बाल रोग विभाग की ओपीडी में 200 बच्चे इलाज को पहुंचे। इसमें छह बच्चों को भर्ती किया गया। इन बच्चों में जुकाम-बुखार के साथ ही निमोनिया की समस्या है। 100 बच्चे सर्दी, खांसी, जुकाम व बुखार से पीड़ित मिले। शेष बच्चों में अन्य बीमारी की समस्या रही। मेडिकल कॉलेज के मीडिया प्रभारी व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.अरविंद शुक्ल ने बताया कि बच्चे सर्दी की चपेट में जल्दी आ जाते हैं जिससे निमोनिया हो जाता है। अधिकांश बच्चे सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार व निमोनिया से ग्रसित हो रहे हैं।
ठंड में हाइपोथर्मिया का खतरा, रहें सावधान
ठंड में शरीर का तापमान कम हो जाए या शरीर पर्याप्त गर्मी न पैदा कर पाएं तो हाइपोथर्मिया की स्थिति पैदा हो जाती है। इसमें रोगी की आवाज धीमी हो जाती है या उसे नींद आने लगती है। पूरा शरीर कांपने लगता है। हाथ-पैर जकड़ने लगती है। दिमाग शरीर का नियंत्रण खोने लगता है। ऐसी स्थिति में फौरन डॉक्टर के पास ले जाएं। मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ.अंशुमान सिंह श्रीनेत ने कहा कि हाइपोथर्मिया होने पर व्यक्ति को गर्म कपड़ों से ढंककर किसी गर्म कमरे या गर्म जगह पर लिटा दें। ठंड लगने पर हृदय की गति भी तेज हो जाती है। रक्तचाप अधिक होने से हृदय संबंधी तकलीफें भी हो सकती है। इसके लिए व्यायाम और सही उपचार पर ध्यान देने की जरूरत है।
ये बरतें सावधानी
-ठंड में टोपी मफलर का प्रयोग करें।
-नियमित रूप से गर्म तरल पदार्थ पिएं और विटामिन सी से भरपूर फल व सब्जियां खाएं।
-हाथ-पैर की उंगलियों, कानों और नाक की नोक पर सुन्नता आदि शीतलहर के लक्षण हैं।
-कंपकंपी को नजरअंदाज न करें, जल्द से जल्द गर्म स्थान पर जाएं।
-बंद कमरे में अंगीठी, कोयला न जलाएं इससे जहरीली गैस निकलती है।