फोटो 26-बहराइच। परिवहन निगम की ओर से चलायी जा रहीं कई बसों की हालत खस्ता है। जर्जर कई बसों में शीशे नहीं हैं तो कुछ बसों में खिड़की खराब होने से शीशे बंद नहीं होते तो वहीं सीटें भी फटी हुई हैं। ऐसे में पूस की रात में रोडवेज की बसों से सफर करने वाले यात्रियों को ठिठुरते हुए अपनी यात्रा पूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
बहराइच रोडवेज बस अड्डे से परिवहन निगम द्वारा विभिन्न मार्गों पर 119 बसों का संचालन किया जा रहा है। सबसे अधिक बसें बहराइच से लखनऊ राजमार्ग पर चलती हैं। इस मार्ग पर सुबह से लेकर रात तक बसों का संचालन होता है। जबकि बलरामपुर, गोंडा, मिहींपुरवा, रुपईडीहा आदि स्थानों के लिए भी बसों का संचालन किया जा रहा है। मगर रोडवेज की अधिकतर बसों की हालत खस्ता है। रोडवेज की बसों में शीशे खराब होने के कारण खिड़की खुली ही रहती है। जबकि सीटों के कवर फटे होने के कारण उन पर बैठना भी मुश्किल होता है। कुछ सीटें टूटी हैं। ऐसे में जाड़े के मौसम में रात का सफर तय करने वाले यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
सुरक्षा यंत्र भी पड़े बेतरतीब
रोडवेज की बसों में आग से बचाव के लिए अग्निशमन यंत्र लगाए जाने के आदेश हैं। अग्निशमन यंत्र को यात्रियों की सुविधा व सुरक्षा को देखते हुए एक स्थान पर रखे जाने का निर्देश है। लेकिन परिवहन निगम के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण यह यंत्र बस के अंदर इधर-उधर पड़ा रहता है। जिससे इनके खराब होने की आशंका भी बनी रहती है। किसी भी हादसे के समय इनका उपयोग करना भी मुश्किल हो सकता है।
यात्री बोले, किराया वसूलते पर सुविधा पर ध्यान नहीं
रोडवेज की बसों से सफर करना किसी संघर्ष से कम नहीं होता है। यह कहते हुए यात्री धीरज व अटल सिंह ने बताया कि उनको बाराबंकी तक जाना है। रोडवेज की बस में बैठने के लिए ठीक से सीट भी उपलब्ध नहीं रहती है। किराया मनमाना वसूला जाता है। मगर सुविधा पर कोई ध्यान नहीं है। यात्री सूरज सिंह व केपी ने कहा कि रोडवेज की बसों में ठंड के समय में खिड़की के किनारे बैठकर सफर नहीं किया जा सकता। कई खिड़की के शीशे बंद नहीं होते हैं। ऐसे में तेज हवा के झोंके से मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
बजती रही घंटी, नहीं उठा फोन
रोडवेज बसों की अव्यवस्थाओं को लेकर बस अड्डे के स्टेशन प्रबंधक रमेश कुमार सेे बात करने का प्रयास किया गया। उनके मोबाइल पर कई बार फोन मिलाने पर घंटी बजती रही। मगर उनका फोन नहीं उठा।