बहराइच : पायनियर स्कूल में बुधवार को गेट पर बच्चों की थर्मल स्क्रीनिंग करतीं शिक्षिका।
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बहराइच। दस माह बाद बुधवार को जब स्कूल खुले तो छात्र-छात्राओं के चेहरे खुशी से खिल उठे। बच्चे चहकते हुए स्कूल पहुंचे। मगर पहले दिन जूनियर स्कूलों में उपस्थिति 50 फीसदी से भी कम रही। कई माह बाद स्कूल खुलने के कारण अभिभावक सशंकित नजर आए। हालांकि इसके बाद भी कक्षाओं में शैक्षणिक गतिविधियां परवान चढ़नी शुरू हो गईं। थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन के बाद ही बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिया गया।
कोरोना के चलते मार्च 2020 से ही स्कूलों में ताले लटक रहे थे। जिले के करीब ढाई हजार स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह से बंद हो गई थी। अब स्कूल खुले तो बुधवार को पहले दिन कक्षा आठ के बच्चों को बुलाया गया। छात्र-छात्राएं चहकते हुए अपने सहपाठियों से मिलने को लालायित नजर आए। मगर बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंता व्यक्त करते दिखे।
इसके बाद भी व्यवस्थाएं धीरे-धीरे पटरी पर लौटती नजर आईं। शहर के पायनियर स्कूल, सेवेंथ डे, बैरोज, डिवाइन ग्रेस आदि स्कूलों में भी पढ़ाई शुरू करा दी गई। वहीं, बेसिक शिक्षा विभाग के जूनियर विद्यालयों में भी कक्षाएं पहले की तरह संचालित होने लगीं। बीएसए दिनेश यादव ने बताया कि स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो गई है। पहले दिन अपेक्षाकृत कम बच्चे आए हैं। आगे इनकी संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
विकासखंड तेजवापुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय मिर्जापुर में छात्र सुबह से पहुंचने लगे थे। स्कूल की प्रधानाध्यापिका सूफिया बेगम ने बताया कि पहले दिन महज 47 बच्चे ही आए हैं। जबकि स्कूल में 80 बच्चे पंजीकृत हैं।
विकासखंड जरवल के पूर्व माध्यमिक विद्यालय जरवल में कक्षा आठ में 39 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इसमें से महज 20 बच्चे ही पहले दिन स्कूल पहुंचे। यहां सैनिटाइजेशन व थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई थी।
अभिभावक अमरेश कुमार व मोहम्मद लईक ने बताया कि दस माह बाद स्कूल खुले हैं। ऐसे में बच्चों के भविष्य को लेकर सभी उत्साहित हैं। मगर उनकी सुरक्षा को लेकर अभी कुछ आशंका भी हैं। अभिभावक महक व नफीसा ने बताया कि अभी कोरोना की वैक्सीन बच्चों को नहीं लगाई गई है। ऐसे में स्कूल भेजने पर संक्रमण के खतरे की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। स्कूलों में सैनिटाइजेशन व हाथ धोने आदि की व्यवस्था पर सभी ने संतोष जताया।