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Bahraich News: अब घर बैठे कर सकेंगे रेशम कीट पालन, मिलेगा अनुदान

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बहराइच। रेशम उत्पादन से जुड़कर स्वरोजगार की राह तलाश रहे युवाओं और ग्रामीणों के लिए अच्छी खबर है। अब रेशम कीट पालन और कोया उत्पादन के लिए अपनी जमीन होना जरूरी नहीं होगा। नई व्यवस्था के तहत बिना भूमि वाले लोग भी अपने घर पर रेशम कीट पालन कर सकेंगे। इसके लिए रेशम विभाग जिले के सरकारी रेशम फार्मों से शहतूत की पत्तियां उपलब्ध कराएगा, जिससे अधिक से अधिक लोग इस व्यवसाय से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।
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जिले में कल्पीपारा, नगरौर, कमोलिया, गजपतिपुर, रेहुआ मंसूर, महादेव, गोपिया और बगहा समेत आठ राजकीय रेशम फार्म संचालित हैं। इन फार्मों के आसपास रहने वाले भूमिहीन कीट पालकों को शहतूत की पत्तियां उपलब्ध कराकर उनके घरों पर ही रेशम कीट पालन कराया जाएगा। विभाग की ओर से रेशम कीट पालन गृह के निर्माण पर लागत का 75 प्रतिशत अनुदान भी दिया जाएगा। वर्तमान में जिले में 136.63 एकड़ क्षेत्रफल में रेशम उत्पादन किया जा रहा है।

रेशम विभाग की ओर से सॉइल टू सिल्क कार्यक्रम के तहत कीट पालकों को कोया उत्पादन से लेकर धागाकरण और रेशम वस्त्र निर्माण तक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। केंद्रीय रेशम बोर्ड और निदेशालय के सहयोग से आए मास्टर ट्रेनर रमाशंकर प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद चयनित 10 कीट पालकों को पिट लूम, इलेक्ट्रॉनिक जैकार्ड, वार्पिंग मशीन और माइक्रो डाइंग टब 75 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे।
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सहायक निदेशक रेशम मिथलेश कुमार सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना के तहत जिले को एक एकड़ श्रेणी के 50 और आधा एकड़ श्रेणी के 100 लाभार्थियों का लक्ष्य मिला है। लाभार्थियों को शहतूत पौधरोपण, रेशम कीट पालन उपकरण, सिंचाई सुविधा, प्रशिक्षण तथा पालन गृह निर्माण पर 75 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
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