फाइलों को जलाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले स्वास्थ्य विभाग की फाइलें जला दी गईं। अब उद्योग केंद्र के महत्वपूर्ण दस्तावेजों को शनिवार देर शाम आग के हवाले कर दिया गया। धुआं उठता देख लोग पहुंचे तो आग लगाने वाले कर्मचारी भाग खड़े हुए। इस मामले में डीएम ने जांच कराकर कार्रवाई करने की बात कही है।
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से भ्रष्टाचार के मामले को लेकर हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। इसका नतीजा यह है कि कार्यालयों में रात में भ्रष्टाचार से संबंधित फाइलें आग के हवाले की जा रही हैं। शनिवार देर शाम कुछ यही स्थिति उद्योग केंद्र दफ्तर में देखने को मिली।
जिलाधिकारी कार्यालय से महज 50 मीटर की दूरी पर स्थित इस कार्यालय के पिछले हिस्से में कुछ कर्मचारी फाइलों के ढेर को आग के हवाले कर रहे थे। धुआं और लपट उठती देख आसपास के लोग मौके पर पहुंचे तो कर्मचारी भाग खड़े हुए। मौके पर उद्योग केंद्र के प्रशिक्षण से संबंधित प्रमाण पत्र, बेरोजगारों के आवेदन से संबंधित फाइलें व अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जलते मिले, जिससे हड़कंप मच गया।
आसपास के लोगों ने सूचना जिलाधिकारी अजयदीप सिंह को दी। जिलाधिकारी ने बताया कि तीन सदस्यीय टीम को जांच सौंपी गई है। मौके पर जो अधजले दस्तावेज मिले हैं, उन्हें कब्जे में ले लिया गया है। किसने दस्तावेज जलवाए, इसकी जांच की जा रही है। कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, इस बारे में जिला उद्योग केंद्र के प्रभारी उपायुक्त विपिन कुमार ने बताया कि उद्योग केंद्र में जो फाइलें और अभिलेख जलाए गए थे। यह अनुपयोगी हो चुके थे। परीक्षण के बाद ही इन सभी को जलाया गया है। किसी महत्वपूर्ण अभिलेख को नहीं जलाया गया है।