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महिला अस्पताल में 15 दिनों से नहीं जीवन रक्षक दवाएं

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बहराइच के मेडिकल कालेज में स्थित जन औषधि केंद्र पर लगी भीड़। - फोटो : BAHRAICH
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बहराइच। मेडिकल कॉलेज की महिला विंग में 15 दिनों से जीवन रक्षक दवाएं नहीं हैं। इससे महिला अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी के लिए आने वाले बच्चों को चिकित्सक मजबूरी में बाहर की दवा लिखते हैं। महिला विंग में बच्चों के लिए खांसी, बुखार व विटामिन की ड्रॉप नहीं है। कुछ यही हाल जन औषधि केंद्र का है। जन औषधि केंद्र में महज 325 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, जबकि मानक 650 की दवाओं का है। इसी तरह जिले के अधिकतर सीएचसी पर एंटीरैबीज इंजेक्शन भी उपलब्ध नहीं है।
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मेडिकल कॉलेज बहराइच में महिला व पुरुष अस्पताल स्थापित है। इस अस्पताल में गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर व नेपाल के मरीज भी इलाज कराने के लिए आते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों की ओपीडी होती है। पुरुष विंग में तो दवाइयां काम चलाने के लिए मौजूद हैं, लेकिन महिला विंग अस्पताल में दवाइयां नहीं हैं। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक महिला विंग में लगभग 15 दिनों से जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे दूरदराज से आने वाली महिलाएं अपने बच्चों की सिर्फ जांच करा पा रही है।
दवा न होने से चिकित्सक मजबूरी में बाहर की दवा लिख रहे हैं। गरीब अपने बच्चों का मंहगे दामों पर इलाज कराने को विवश हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन महिला विंग में दवा नहीं उपलब्ध करा रहा है। महिला विंग में सिर्फ एसएनसीयू वार्ड में ही जीवन रक्षक दवाएं हैं। यह दवाएं सिर्फ गंभीर रोगों से पीड़ित नवजात रोगियों को ही दी जा सकती है। मेडिकल कॉलेज में स्थित जन औषधि केंद्र में केंद्र सरकार की ओर से 625 प्रकार के दवाओं की उपलब्धता का मानक निर्धारित है।
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अस्पताल प्रशासन भी दवाएं उपलब्ध होने का दावा कर रहा है। लेकिन इस समय महज 325 तरह की दवाएं ही उपलब्ध हैं। इन दवाओं से ही मरीज अपना इलाज करा रहे हैं। जिला मुख्यालय पर एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध है। लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति काफी दयनीय है। यहां आने वाले मरीजों को एंटी वेनम इंजेक्शन के लिए जिला मुख्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। जिला मुख्यालय न आने वाले मरीज मेडिकल स्टोर पर मंहगे दामों पर दवा की खरीद कर इलाज कराते हैं।
महिला विंग में नहीं हैं यह दवाएं
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक महिला विंग में 15 दिनों से जीवन रक्षक दवाओं का अभाव है। इनमें बच्चों को दी जाने वाली विटीमिन ए ड्रॉप, खांसी, बुखार और इंजेक्शन शामिल हैं। इससे मासूम रोगियों का इलाज कराने वाले तीमारदारों को बाहरी दवाएं खरीदने की मजबूरी हैं।
जन औषधि केंद्र पर लगती है भीड़
केंद्र सरकार की ओर से जन औषधि केंद्र का संचालन दो वर्ष पूर्व शुरू किया गया था। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला मुख्यालय के अलावा नानपारा सीएचसी में इसका संचालन किया जा रहा है। जिला मुख्यालय स्थित जन औषधि केंद्र में प्रतिदिन मरीजों की काफी भीड़ रहती है। इसका मुख्य कारण दवाएं सस्ती मिल रही हैं। साथ ही चिकित्सकों की ओर से बाहर की दवाएं न लिखना बताया जा रहा है।
अस्पताल में उपलब्ध हैं दवाएं
पुरुष अस्पताल व महिला विंग में जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध हैं। जिन दवाओं की कमी रहती है, उन्हें पत्र लिखकर मंगवाया जाता है। मरीजों को परेशानी नहीं होने दी जा रही है। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक सभी मरीज को जन औषधि केंद्र की दवा लिख रहे हैं। महिला विंग में दवाओं की कमी की जांच करा रहे हैं। जल्द ही दवाइयां पूरी की जाएंगी।
- डॉ. डीके सिंह, सीएमएस
पत्र मिलते ही सीएचसी पर भेजी जातीं दवाएं
जिले में स्थापित सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं का कोटा पूरा है। कभी-कभी दवाएं कम होने पर अधीक्षक द्वारा पत्र लिखा जाता है। पत्र मिलते ही दवाइयां भेज दी जाती हैं। दवा की डिमांड पूरी करने की हरसंभव कोशिश की जाती है। सीएचसी पर एंटी वेनम इंजेक्शन भी उपलब्ध है।
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- डॉ. सुरेश सिंह, सीएमओ
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