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शिक्षक न संसाधन, कैसे पढ़ेंगे अपर क्लास बच्चे

Wed, 19 Aug 2015 09:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
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बहराइच। सरकार, मंत्रियों और अफसरों की उपेक्षा के कारण आज सरकारी स्कूल बदहाल हैं। कहीं, स्कूल भवन जर्जर है तो कहीं शिक्षकों के अभाव में पढ़ाई प्रभावित है।
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पुस्तकालय की परंपरा तो मानो यहां कई साल पहले ही खत्म हो चुकी हो। पेयजल और शौचालय की सुविधा कहीं है तो कहीं नदारद।

अगर इन विद्यालयों में नेताओं और अधिकारियों के बच्चे पढ़ते तो आज ये भी निजी स्कूलों की तरह सुविधा संपन्न होते। लेकिन, लापरवाही और भ्रष्टाचार का घुन ऐसा लगा है कि इनकी हालत दयनीय हो गई है।

इसी असमानता को खत्म करने के लिए अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक आदेश सुनाते हुए मंत्री, नेताओं और अफसरों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ने का फरमान सुनाया है।
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बुधवार को अमर उजाला ने पड़ताल की तो बहराइच के मंत्रियों और विधायक के बच्चों के कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ने की पुष्टि हुई। कई अधिकारियों के बेटे भी निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं।

सरकारी स्कूलों की जो हालत है उसे देखकर ही मंत्री और अफसर अपने बच्चों को यहां भेजने की जहमत नहीं उठाते। बजट के अभाव में स्कूलों में रंग-रोगन न होना सामान्य बात है।

शिक्षकों की भी भारी कमी है। जिले के राजकीय इंटर कॉलेजों में 350 सहायक अध्यापकों की जरूरत है। यही स्थिति सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की भी है। यहां भी 300 के आसपास पद रिक्त हैं।

इन विद्यालयों में पुस्तकालय नहीं हैं। खेल के मैदान हैं तो जरूर पर या तो संसाधन हैं नहीं और अगर हैं तो काफी पुराने हैं।

प्राथमिक और जूनियर स्कूलों में शिक्षकों की कमी काफी हद तक पूरी हुई है लेकिन स्कूलों बदहाल हैं। टाट-पट्टी पर ही पढ़ाई होती है।

महसी, कैसरगंज, मिहींपुरवा, रिसिया, नवाबगंज, जरवल इलाकों में कई स्कूल भवन तो ऐसे हैं, जिनके गेट नदारद हैं। स्कूलों में स्थापित शौचालय बदहाल हैं।

हैंडपंप खराब होने से कई बार छात्र आंदोलन भी कर चुके हैं। वहीं, बहराइच के 212 निजी स्कूलों में 95 हजार बच्चे अध्ययनरत हैं, जो सरकारी के आधे भी नहीं हैं। लेकिन यहां सुविधाएं हैं, जो मंत्रियों और अफसरों के बच्चों को आकर्षित करती हैं।

इन माननीयों के लाडले कॉन्वेंट में
बात शुरू करते हैं प्रदेश के ऊर्जा राज्यमंत्री यासर शाह से। ऊर्जा राज्यमंत्री का एक पुत्र अयात शाह सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट इंटर कॉलेज में कक्षा तीन का छात्र है, जबकि पुत्री आबिया और आमिया भी इसी विद्यालय में प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ रहे हैं।

वहीं, पयागपुर विधायक मुकेश श्रीवास्तव की बेटी सृष्टि श्रीवास्तव लखनऊ के लॉरेटो कॉन्वेंट में प्राथमिक कक्षा की छात्रा है। महसी विधायक केके ओझा का बड़ा बेटा विशाल किसान डिग्री कॉलेज में बीएससी द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। जबकि छोटा बेटा शशांक डिवाइन ग्रेस पब्लिक स्कूल में कक्षा सात का छात्र है।

नानपारा विधायक माधुरी वर्मा का पुत्र अजमेरी तिरुपति वर्मा रामस्वरूप इंटर कॉलेज लखनऊ में जूनियर कक्षा में पढ़ रहा है, जबकि बेटी ममता वर्मा कोटा राजस्थान में कोचिंग कर रही है। वहीं बड़ी बेटी संजू लखनऊ में एमबीबीएस की तैयारी कर रही है।

न्यायालय का निर्णय सराहनीय, कराएंगे अनुपालन ः डीएम
जिलाधिकारी अभय कुमार का कहना है कि न्यायालय ने शिक्षा में सुधार के लिए जो आदेश किया है, वह काफी सराहनीय है। न्यायालय की कॉपी शासन द्वारा प्रदान की जाएगी। जो आदेश होगा, उसके तहत अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा। जिले के प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों तथा अन्य सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए पहले से ही प्रयास चल रहे हैं। ग्रामीण अंचलों के परिषदीय विद्यालयों में बाउंड्रीवाल की व्यवस्था कराई गई है। स्कूलों को गोद लेकर उनकी स्थिति काफी हद तक सुधारी गई है। टास्क फोर्स द्वारा भी औचक निरीक्षण करवाया जाता है।

न्यायालय का आदेश सर्वोच्च, होगा पालन ः बीएसए
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अमरकांत सिंह, शिक्षा व्यवस्था सुधार के लिए माननीय उच्च न्यायालय ने जो आदेश दिया है, उसका शत प्रतिशत पालन कराएंगे। आदेश के पालन से शिक्षा व्यवस्था में नि:संदेह सुधार होगा। फिलहाल अभी अखबारों में ही पढ़ा है। आदेश की कॉपी नहीं मिली है। आदेश की प्रति मिलने पर उसी के तहत कार्रवाई करेंगे।
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