श्रावस्ती। नवजात की मौत के अधिकांश मामलों में कारण जन्म के समय होने वाला पीलिया व समय पर वार्मर न मिलना है। इस समस्या से अब जिले को निजात मिल गई। संयुक्त जिला चिकित्सालय में नियोलेटल केयर यूनिट स्थापित की गई है।
इसका औपचारिक शुभारंभ तो नहीं हुआ लेकिन इस यूनिट में पांच बच्चों का इलाज चल रहा है। ये मंडल में सबसे आधुनिक यूनिट है। इसमें 12 वार्मर व छह फोटोथ्रेपी मशीनें लगी हैं।
जन्म के समय लगभग सभी बच्चों को पीलिया की शिकायत होती है। समय पर इसका इलाज न होने के कारण अधिकांश बच्चे या तो मौत के मुंह में चले जाते हैं। या फिर आंशिक विकलांगता का शिकार हो जाते हैं।
जिले में अब तक ये सुविधा न होने के कारण लोगों को बहराइच सहित अन्य जिलों का सहारा लेना पड़ता था। जहां नवजात का इलाज कराने पर दो हजार रुपये प्रतिदिन खर्च आता है।
फोटोथ्रेपी व वार्मर में कम से कम सात दिन ट्रीटमेंट कराना होता है। ऐसे में गरीब से गरीब अभिभावकों को नवजात के इलाज पर 14-15 हजार रुपये खर्च करने पड़ते थे। मगर अब जिला चिकित्सालय में नवजात के इलाज की ये सुविधा निशुल्क मिलेगी।
संयुक्त जिला चिकित्सालय के शिशु वार्ड में सिक नियोनेटल केयर यूनिट की स्थापना की गई है। इसमें 18 बच्चों को एक साथ भर्ती करने की सुविधा है। इस यूनिट में 12 वार्मर व छह फोटोथ्रेपी मशीनें लगी हैं। औपचारिक शुभारंभ न होने के बाद भी इस यूनिट में पांच बच्चों का इलाज चल रहा है।
24 घंटे निशुल्क सेवा
शून्य से 28 दिन तक के बच्चों को उनकी आवश्यकता के मुताबिक वार्मर मशीन से टेंपरेचर दिया जाता है। इसके साथ ही पीलिया, प्री-मेच्योर व कमजोर बच्चों को भी इस यूनिट का लाभ मिलेगा। ये सुविधा 24 घंटे पूर्ण रूप से निशुल्क उपलब्ध है।
- डॉ. प्रदीप, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, संयुक्त जिला चिकित्सालय