बहराइच। शासन की नई पर्यटन नीति से बहराइच में पर्यटन को बल मिल सकता है। यहां के तालाब बघेल झील और चित्तौरा झील के तट को पर्यटन के रूप में विकसित कर जिले को कतर्नियाघाट की तरह ही प्रदेश और देश के मानचित्र पर स्थापित किया जा सकता है।
नीति के तहत शहरों में कहीं भी होटल खोलने की अनुमति होगी। इससे पर्यटकों की सुविधाएं भी बढ़ेंगी। नई नीति से ईको टूरिज्म की दिशा में संवर रहे कतर्निया को और सुविधाओं से सुसज्जित किया जा सकता है।
गौरतलब हो कि टेढ़ी नदी का उद्गम स्थल चित्तौरा झील का तट राजा सुहेलदेव की कर्मस्थली भी मानी जाती है। इसके साथ ही सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह भी देशभर में बहराइच की पहचान के रूप में विख्यात है। यहां थीम पार्क व सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।
होटल बनने से विदेशी पर्यटकों को सहूलियत
अभी तक विदेश से आने वाले पर्यटकों को ठहरने के लिए समुचित सुविधाओं का अभाव है लेकिन नई पर्यटन नीति से शहर में होटल की स्थापना को बल मिलेगा। बिना किसी बंदिश के होटल का निर्माण हो सकेगा, जिससे विदेशी पर्यटकों की समस्याएं दूर होंगी।
हेल्पलाइन बनेगी, दुभाषिये होंगे मददगार
नई नीति में हेल्पलाइन स्थापना की कवायद को अमलीजामा पहनाया जा सकेगा। डीएफओ की मानें तो इसके लिए बातचीत चल रही है। साथ ही विदेशों से आने वाले पर्यटकों के बीच संवाद स्थापित करने के लिए दुभाषियों की भी व्यवस्था की जाएगी।
बस संचालन के लिए शासन को लिखेंगे पत्र
डीएफओ आशीष तिवारी ने बताया कि कतर्नियाघाट सेंक्चुरी को इको टूरिज्म के रूप में विकसित किया गया है। प्रकृति बाजार भी स्थापित है, जिसके तहत पर्यटकों को प्राकृतिक उत्पादों से तैयार वस्तुएं मुहैया कराई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि यहां अभी पर्यटक अपने संसाधनों से आते हैं। नई नीति के तहत बस संचालन के लिए शासन को पत्र लिखेंगे।
पर्यटन के विकास के लिए उठाएंगे हर कदम
नई पर्यटन नीति से बहराइच जिले को नई पहचान मिल सकती है। यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। ऐसे में तालाब बघैल झील, चित्तौरा झील व कतर्नियाघाट को और पर्यटन सुविधाओं से सुसज्जित करने के लिए शासन से पत्राचार किया जाएगा। हर संभव कदम उठाए जाएंगे, जिससे बहराइच को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दी जा सके। - विद्याशंकर सिंह, अपर जिलाधिकारी