चरस तस्करी में लिप्त एक नेपाली युवक को वर्ष 2007 में नेपाल सीमा पर एसएसबी के जवानों ने दबोचा था। वह चरस की खेप लेकर उत्तरकाशी जा रहा था। इस मामले में गुरुवार को अपर सत्र न्यायाधीश ईसी एक्ट ने सुनवाई करते हुए नेपाली युवक को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपये जुर्माना से भी दंडित किया है।
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित एसएसबी सातवी वाहिनी के जवानों को छह नवंबर 2007 को सीमा पार से चरस की खेप आने की सूचना मिली थी। इस पर तत्कालीन सहायक सेनानायक पीएल जैन ने जवानों को अलर्ट कर नोमेंस लैंड पर गश्त तेज कर दी थी। पिलर संख्या 29-30 के मध्य उसी दिन एक नेपाली नागरिक को सीमा पार करते हुए दबोचा गया था। उसके बैग से 18 पैकेट में दो किलो 120 ग्राम चरस बरामद हुई थी। नेपाली नागरिक की पहचान प्रकाश बूढ़ा मगर पुत्र टेकबहादुर बूढ़ा मगर निवासी ग्राम विकास समिति कुरेरी वार्ड नंबर आठ जनपद रोलपा नेपाल के रूप में हुई थी। पूछताछ के दौरान प्रकाश बूढ़ा ने बताया था कि वह उत्तरकाशी में मजदूरी करता है। वहीं पर गजौली थारिया नामक स्थान पर वह चरस की खेप लेकर जा रहा था।
बरामद चरस को सीज कर आरोपी को न्यायालय पर पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। इस मामले में 23 अप्रैल 2008 को तत्कालीन अपर सत्र न्यायाधीश कमल चौधरी के न्यायालय पर सुनवाई के दौरान उसे आरोपी सिद्ध किया गया। लेकिन प्रकाश बूढ़ा ने आरोप से इंकार करते हुए मामले के पुन: सुनवाई की बात कही थी। तब से मामला चल रहा था। गुरुवार को अपर सत्र न्यायाधीश ईसी एक्ट सुरेशचंद्र भारती के न्यायालय पर फाइल पेश की गई। सुनवाई के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संत प्रताप सिंह और बचाव पक्ष के वकील ने बहस की। बहस सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश भारती ने आरोपी प्रकाश बूढ़ा मगर को दोषसिद्ध करार देते हुए 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। एक लाख रुपया जुर्माना से भी दंडित किया है।