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भारत पर नाजायज तोहमत मढ़ रही नेपाल सरकार

Sun, 04 Oct 2015 10:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
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मधेसी भी नेपाल के नागरिक हैं और अलग प्रदेश स्थापना के लिए हमें पूरा अधिकार है। नेपाल को राजशाही से निकालने के लिए जनयुद्ध में हम सबने भागीदारी की और अब उस वक्त हुए समझौतों से सरकार मुकर रही है। अब मधेसियों के आंदोलन को कुचलने के लिए भारत पर यूएनओ में निशाना साधा जा रहा है।
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नेपाल सरकार मधेस आंदोलन कुचलने के लिए भारत पर तोहमत मढ़ रही है। यह कहना है तराई थारुहट संघर्ष समिति के आंदोलनकारियों का। आंदोलनकारियों का मानना है कि मधेसियों की पीड़ा को भी संयुक्त राष्ट्र को महसूस करना होगा। उन्होंने साफ किया कि समाधान निकलने तक नाकाबंदी जारी रहेगी।

नेपाल में झापा से कंचनपुर दो माह पहले सुलगी मधेस प्रदेश स्थापना की चिंगारी अब लपटों में तब्दील हो गई है। आंदोलनकारियों ने भारत सीमा से सटे इलाकों में नाकाबंदी कर आवश्यक वस्तुओं के वाहनों को नेपाल में प्रवेश करने से रोक दिया है। इससे खाद्यान्न और पेट्रोलियम संकट पैदा हो गया है।
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इस मामले में रविवार को संयुक्त तराई थारुहट मधेस संघर्ष समिति के पदाधिकारी नेपाल सरकार के कदम से आहत दिखे। समिति के प्रवक्ता व तराई मधेस लोकतांत्रिक पार्टी के केंद्रीय समिति सदस्य पशुपति दयाल मिश्र का कहना है कि 150 वर्ष पूर्व राणा शासन और अंग्रेजों में समझौते के तहत बलरामपुर स्टेट का भूभाग नेपाल को सौंप दिया गया था। तभी से हम लोग नेपाल के नागरिक हो गए।

ऐसे में अलग मधेस प्रदेश की स्थापना की मांग करना गुनाह नहीं है। हम मूलभूत सुविधाओं के लिए अपना अधिकार मांग रहे हैं। नेपाल सरकार भारत को निशाना बनाकर हमारे आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रही है। सरकार इस कदम से आंदोलन से ध्यान हटाना चाहती है, लेकिन ऐसा नहीं होगा। संघर्ष समिति के सचिव व नेपाल उद्योग वाणिज्य संघ के ललित रौनियार भी कहते हैं कि आंदोलन से नेपाल को अरबों का नुकसान हुआ है।

लेकिन अगर हम आवाज नहीं उठा सकते तो फिर कैसा लोकतंत्र। इससे ठीक तो राजशाही ही थी। तराई मधेस लोकतांत्रिक पार्टी के सदस्य व सद्भावना पार्टी गजेंद्र गुट के जिलाध्यक्ष राजकिशोर मिश्रा ने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। मांगें पूरी होने तक नाकाबंदी चलेगी। ऐसे में भारत पर आरोप मढ़ना सरासर गलत है।

संगठन के केंद्रीय सदस्य गिरिजा प्रसाद ने नेपाल पुलिस पर आंदोलनकारियों को फर्जी मामलों में फंसाने का आरोप लगाया। कहा कि नेपाल सरकार का भारत के खिलाफ यूएन में जाना उसकी खीझ दर्शाता है। संघर्ष समिति के संयोजक विजय गुप्ता ने कहा कि सरकार आंदोलन को दूसरी तरफ मोड़ने की कोशिश कर रही है। संघर्ष समिति के सह संयोजक कमरुद्दीन राई ने कहा कि सयुंक्त राष्ट्र को मधेसियों की पीड़ा भी सुननी होगी, एहसास करना होगा।
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