बिछिया (बहराइच)। दुधवा टाइगर रिजर्व के लखीमपुर खीरी और कतर्नियाघाट रेंज की सीमा पर रेलवे लाइन के किनारे शनिवार को एक नेपाली हाथी का शव पड़ा मिला। संदिग्ध हालात में तारों के बीच उलझा हुआ उसका शव मिलने की सूचना पर दोनों रेंज के डीएफओ व दुधवा के फील्ड डायरेक्टर मौके पर पहुंचे।
सात घंटे से दोनों रेंज की सीमा विवाद में मामला फंसा हुआ है। हालांकि वन विभाग ने तीन चिकित्सकों के पैनल से शव का पोस्टमार्टम कराने की बात कही, लेकिन देर शाम तक उसके शव को मौके से हटाया नहीं गया है।
दुधवा टाइगर रिजर्व अंतर्गत लखीमपुर खीरी जनपद के खैरटिया गांव का हिस्सा कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र की सीमा से सटा हुआ है। खैरटिया गांव में गोंडा-मैलानी रेलवे लाइन के पास पिलर संख्या 177/5 के निकट किसान जागीर सिंह के खेत में एक नर हाथी को दोपहर कुछ लोगों ने मृत हालत में देखा। इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी गई।
सूचना मिलने पर वन विभाग के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक, नार्थ खीरी के डीएफओ मनोज सोनकर, बेलरायां के रेंजर दिनेश भदोला, कतर्नियाघाट के डीएफओ जीपी सिंह, वन क्षेत्राधिकारी पीयूष मोहन श्रीवास्तव, वन दरोगा मयंक पांडेय, कौशलकिशोर आदि मौके पर पहुंचे। हाथी का शव तारों के बीच फंसा है।
कतर्नियाघाट के एसडीओ यशवंत सिंह ने बताया कि हाथी की संदिग्ध हालात में मौत हुई है। संभावना है कि तार फेसिंग में करंट दौड़ने की वजह और गड्ढे से नहीं निकल पाने के कारण उसकी मौत हुई है। हालांकि अभी सीमा विवाद नहीं सुलझ सका है। इसके बावजूद तीन चिकित्सकों के पैनल से उसके शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी की जा रही है।
30 साल का है नर हाथी
उप प्रभागीय वनाधिकारी यशवंत सिंह ने बताया कि रेलवे लाइन के पास मृत मिले हाथी की उम्र 30 वर्ष है। वह नर हाथी है। संभावना है कि धान के खेत में भोजन की तलाश में जाते समय गड्ढे में गिर गया और वहां से बाहर निकलने के प्रयास में तार में फंसकर उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।