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बजट खर्च करने में लापरवाही

Mon, 27 Mar 2017 11:47 PM IST
अमर उजाला/बहराइच
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अधूरा पड़ा भवन - फोटो : अमर उजाला
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मार्च के अंतिम सप्ताह में बजट को खत्म करने में विभागीय अफसरों में होड़ मची हुई है। लेकिन जिले के अलग-अलग विभागों में आए लगभग 30 करोड़ के बजट को सरेंडर करने में अधिकारियों को पसीने छूट रहे हैं। 30 करोड़ की यह राशि अफसरों को सरेंडर करना मजबूरी होगी। 
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बजट के बावजूद जिले के विकास कार्यों में वर्तमान समाप्त हो रहे सत्र में जमकर कोताही बरती गई। जिसका आलम यह है कि जिला विकास की ओर नहीं बढ़ सका। लोहिया गांवों में सड़क निर्माण को आए 12 करोड़ रुपये पीडब्ल्यूडी के पास डंप हैं, वहीं आवासों की दस करोड़ की रकम भी अफसर खर्च नहीं कर सके हैं। यह 10 करोड़ भी खाते में जमा हैं।

पावर कॉर्पोरेशन के पास भी राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना व भूमिगत लाइन योजना के करीब तीन करोड़ रुपये खर्च नहीं हो सके हैं। जबकि कुछ परियोजनाओं पर आधी अधूरी रकम आने के कारण काम ठप पड़े हुए हैं।
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मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए बजट ही नहीं भेजा गया, जिससे आधारशिला के बाद से काम शुरू ही नहीं हो सका। इसी तरह रोडवेज बस अड्डे के निर्माण का काम भी धन नहीं मिलने के कारण धीमी गति से चल रहा है। ट्रॉमा सेंटर का काम भी पूरा बजट नहीं मिलने के कारण आधा अधूरा पड़ा है।

वहीं, राजकीय पॉलीटेक्निक और महिला पॉलीटेक्निक को भी बजट नहीं मिलने से काम अधर में लटका है। राजकीय इंटर कॉलेज को भी लगभग चार करोड़ के बजट की दरकार है। 

इंसेट 
विभाग        बजट         मिली रकम    खर्च
पीडब्ल्यूडी     27            18        6.07
डीआरडीए     32           22          10
एमएसडीपी     34            9           9
ट्रॉमा सेंटर     1.68          1.57            1.57
पावर कॉर्पोरेशन 91.59             91.59      90    
मनरेगा         107          107         107    
(नोट- धनराशि करोड़ रुपये में)

कोट 
रकम खर्च करने के दिए निर्देश
सभी सरकारी महकमों के अफसरों को निर्देश जारी किया गया है कि वित्तीय सत्र के समाप्त होने से पहले विभागीय बजट को खत्म करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। जिन अफसरों द्वारा इसमें लापरवाही बरती जाएगी, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी होगी। 
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अजय दीप सिंह, जिलाधिकारी, बहराइच
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