खैरीघाट (बहराइच)। अक्तूबर माह में हुई रिकॉर्ड बारिश व बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़ दी है। अक्तूबर में 300 मिलीमीटर से ज्यादा हुई बारिश के बाद आई भीषण बाढ़ से लाखों किसानों की फसलें चौपट हो गईं हैं। लगभग 150 गांव बाढ़ की चपेट में रहे। आंकड़ों की माने तो जिले में लगभग 68 हजार हेक्टेअर पर लगी किसानों की फसल चौपट हो गई है। जिसके चलते किसान दीपावली को लेकर निराश हैं। खेतों लगभग तैयार हो चुकी फसल के नष्ट हो जाने से किसान दुखी हैं।
सरकार करे किसानों की मदद
भारी बारिश व बाढ़ से पूरी फसल चौपट हो गई। हर साल बच्चों के साथ हंसी-खुशी दीपावली की खुशियां साझा करता था, लेकिन इस बार खेतों में कुछ है ही नहीं। किसके सहारे पर्व मनाएं। सरकार को चाहिए कि किसानों का दर्द बांटे और सर्वे करवाकर सभी किसानों को आर्थिक मदद करे। -तूफानी प्रसाद, अगंरौरा महसी
सब कुछ तबाह हो गया, कैसे मनाएं दिवाली
दीपावली पर्व खुशियों का है। लेकिन इस बार बाढ़ ने सब कुछ छीन लिया, तो किस बात की खुशी मनाएं। हालात यह हैं कि मवेशियों के लिए चारा तक नहीं मिल पा रहा है। बच्चे पटाखों के लिए जिद कर रहे हैं। बाढ़ ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। इस बार की दीपावली सबसे ज्यादा कष्टकारी है।-कालिका सिंह, गरेठी गुरदत्त सिंह
गेहूं फसल की बुवाई के लिए पूंजी नहीं
दीपावली पर्व पर हर साल खुशी-खुशी दीए जलाते थे और बच्चों के साथ पटाखे और फुलझड़ियां जला कर खुशियां मनाते थे। लेकिन तब खेतों में फसल लहलहा रही होती थी और उम्मीद रहती थी कि फसल तैयार होने के बाद पैसा आएगा। लेकिन इस बार बाढ़ ने सब छीन लिया। आलम यह है कि गेहूं की बोआई के लिए पूंजी की भी समस्या हो सकती है। -केशवराम सिंह, बांसगढ़ी
आधी खुशियों के साथ मनाएंगे पर्व
दीपावली पर्व है तो किसी तरह मनाना ही पड़ेगा। लेकिन इस बार पर्व की खुशियां खत्म हो गई हैं। बाढ़ ने सब छीन लिया है। बच्चों की जिद पूरी करने के लिए आधी खुशियों के साथ दीपावली मनाएंगे। बीते 30 सालों में इतनी बेकार दीपावली नहीं देखी। -देवाराम बाजपेयी, कोटिया