नानपारा। ग्राम लीलापुरवा में रंजिशन हुए हमले और गोलीकांड के मामले में नामजद एक आरोपी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से मामला और उलझ गया है। आरोपी की मौत के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्राम लीलापुरवा निवासी प्रमोद कुमार ने 12 मई को थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि रंजिश के चलते कुछ लोगों ने उनके चचेरे भाई विनोद को गोली मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना में प्रमोद, उनके भाई कैलाश और रामरूप की भी पिटाई की गई थी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर राधेश्याम, धनीराम, राममूरत और शंकर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
बताया जा रहा है कि 12 मई की रात करीब 11 बजे कुछ पुलिस कर्मी आरोपी राममूरत को लेकर सीएचसी नानपारा पहुंचे थे। वहां उसे पेट दर्द की शिकायत बताई गई। चिकित्सकों ने उसे तीन इंजेक्शन लगाए। हालत में कुछ सुधार होने के बाद पुलिस कर्मी उसे जिला चिकित्सालय ले जाने की बात कहकर अपने साथ ले गए।
इसके बाद 14 मई की देर रात पुलिस कर्मी राममूरत का शव लेकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और पोस्टमार्टम के लिए रखवा दिया। हालांकि शुक्रवार देर शाम तक मृतक के परिजन पोस्टमार्टम हाउस नहीं पहुंचे थे।
घटना के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। 12 मई की रात से लेकर 14 मई तक राममूरत कहां था, उसे कौन सी बीमारी थी और दो दिन तक पुलिस ने उसे कहां रखा। इन सभी बिंदुओं को लेकर पुलिस कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इस संबंध में थाना प्रभारी राजनाथ सिंह ने बाद में जानकारी देने की बात कही। वहीं सीओ पहुप सिंह ने बताया कि युवक एक मामले में आरोपी था और उसकी मौत बीमारी के चलते उसके घर पर हुई है।
घर से नदारद हैं परिजन
राममूरत के परिवार के लोगों के पोस्टमार्टम हाउस न पहुंचने से अंत्यपरीक्षण की प्रक्रिया नहीं हो सकी है। राममूरत के घर पर ताला लगा है। परिजन कहां हैं, कोई बता नहीं पा रहा। उधर पुलिस ने पोस्टमार्टम के कागजात में परिवार का जो मोबाइल नंबर दर्ज कराया है, वह नौ अंक का ही है।