नानपारा (बहराइच)। नगर में संचालित पैथालॉजी व नर्सिंगहोम में शुक्रवार को उपजिलाधिकारी ने पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ छापा मारा। इस दौरान सिटी क्लीनिक के चिकित्सक व संचालक नदारद मिले। कोई कागजात भी मौके पर नहीं मिला। इस पर टीम ने सिटी क्लीनिक को सील कर दिया। अस्पताल में भर्ती मासूमों को 108 एंबुलेंस से ले जाकर सीएचसी में भर्ती कराया गया। वहीं, पैथालॉजी व नर्सिंगहोम के निरीक्षण में गंदगी मिलने पर एसडीएम ने कड़ी फटकार लगाई। अधिकारियों की इस कार्रवाई से नगर में हड़कंप मचा रहा।
जिलाधिकारी शंभु कुमार के निर्देश पर नानपारा तहसील के उपजिलाधिकारी डॉ. राम आसरे वर्मा की अगुवाई में डिप्टी सीएमओ डॉ. पीके बांदिल, कस्बा इंचार्ज सुधीर शुक्ला नगर में स्थित उन्नति पैथालॉजी पहुंचे। यहां पर टीम ने व्यवस्थाएं जांची।
इसके बाद अधिकारियों की टीम ने अहमद व आधुनिक पैथालाजी सेंटर का निरीक्षण किया। यहां गंदगी मिलने पर नाराजगी जताते हुए संचालकों को सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। साथ ही मरीजों के बैठने की उचित व्यवस्था करने की बात कही।
पैथॉलाजी का निरीक्षण करने के बाद अधिकारियों की टीम नानपारा तहसील के सामने संचालित सिटी क्लीनिक पहुंची। यहां जांच के दौरान चिकित्सक नदारद थे। एनआईएसयू केंद्र में चार बच्चे भर्ती मिले, जबकि पांच बच्चे जनरल वार्ड में भर्ती थे। इनको देखने के लिए कोई चिकित्सक व संचालक मौके पर नहीं मिला।
इस पर एसडीएम ने लाइसेंस की जानकारी ली तो पता चला कि लाइसेंस डॉ. रफीक अहमद के नाम से है। पैरा मेडिकल शैलेंद्र कुमार की तैनाती है। जबकि इस अस्पताल का संचालन डॉ. डीएन त्रिपाठी कर रहे थे। इस पर डिप्टी सीएमओ डॉ. बांदिल ने सीएमओ को अवगत कराया।
सीएमओ के निर्देश पर नानपारा सीएचसी के डॉ. सोलंकी व डॉ. चंद्रभाल मौके पर पहुंचे। नायब तहसीलदार मनीष कुमार व अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में सिटी क्लीनिक को सील कर दिया गया। जबकि वार्ड में भर्ती मासूमों को 108 एंबुलेंस से ले जाकर नानपारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।
अभी तक नहीं मंजूर हुआ वीआरस
डॉ. डीएन त्रिपाठी नानपारा सीएचसी में तैनात हैं। उन्होंने वीआरएस के लिए आवेदन कर रखा है। लेकिन शासन से डॉ. डीएन त्रिपाठी का वीआरएस अभी तक मंजूर नहीं हुआ है। ऐसे में अस्पताल के संचालन पर सवाल उठ रहे हैं।
लाइसेंस नर्सिंगहोम का, संचालित हो रहा था चाइल्ड केयर
एसडीएम रामआसरे वर्मा ने बताया कि सिटी क्लीनिक के लाइसेंस की जांच करने पर पता चला कि नर्सिंगहोम बड़े लोगों के इलाज के नाम पर लाइसेंस लिया गया है। जबकि इसका संचालन चाइल्ड केयर के नाम से किया जा रहा है। जिसमें मासूमों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। इसकी भी जांच कराई जा रही है।
व्यवस्थाएं अधूरी
संचालक डॉ. डीएन त्रिपाठी ने बताया कि अभी नया निर्माण कराया गया था। ऐसे में यहां पर व्यवस्थाएं अधूरी थीं। इनको ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा था। इसी बीच प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्रवाई कर दी है। जल्द ही व्यवस्थाओं में सुधार कर लिया जाएगा।