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Bahraich News: कागजों पर माइक्रोप्लान तैयार, जमीन पर नहीं पहुंच रहीं टीमें

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जिले में बिना टैग के पशुपालकों के यहां बंधे मवेशी। 
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बहराइच। पशु टीकाकरण अभियान की जमीनी हकीकत खोखली है। पशु चिकित्सा विभाग ने टीकाकरण के लिए बाकायदा माइक्रोप्लान भी तैयार किया, लेकिन 22 जुलाई से शुरू हुए इस अभियान का लाभ उठाने के लिए पशु और पशुपालक इंतजार कर रहे हैं। कहीं कुछ पशुओं को टीका लगा, तो कई गांवों में अभियान शुरू ही नहीं हो सका है।
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बरसात के मौसम में जिले में 6,16,300 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य है। माइक्रोप्लान के तहत अलग-अलग क्षेत्रों के लिए टीमें गठित की गईं। विभागीय व्यवस्था के अनुसार उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी और पशु चिकित्साधिकारी स्तर के महज 32 कर्मियों पर अभियान की बड़ी जिम्मेदारी है। इस बीच पैरावेट कर्मियों ने मानदेय बढ़ाने समेत अन्य मांगों को लेकर शुरू हुआ कार्य बहिष्कार टीकाकरण अभियान पर असर डाल रहा है।
काशीजोत में 1200 पशु, टीम का इंतजार
पयागपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत काशीजोत में करीब 1200 पशु हैं। ग्रामीण राजेंद्र चौहान के मुताबिक गांव में अभी तक टीकाकरण टीम नहीं पहुंची। बरसात के बीच पशुओं में संक्रमण की आशंका बनी हुई है और पशुपालक टीकाकरण को लेकर चिंतित हैं।
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- बौंडी में 1600 में सिर्फ 200 का टीकाकरण
फखरपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत बौंडी में करीब 1600 मवेशी हैं। प्रधान प्रतिनिधि पवन सिंह बताते हैं कि करीब 200 पशुओं का ही टीकाकरण हो सका है। इसके बाद अभियान ठप हो गया। गांव के कई हिस्सों में बाढ़ का पानी भरा होने से पशुपालकों की चिंता और बढ़ गई है।

पूरे जैता में 2000 पशु, टीकाकरण शून्य
हुजूरपुर विकासखंड के पूरे जैता में करीब 2000 पशु हैं। प्रधान प्रतिनिधि डॉ. पवन कुमार सिंह के अनुसार यहां अभी तक टीकाकरण नहीं हो सका है। उनका कहना है कि पशु चिकित्सालयों में पहले से चिकित्सकों की कमी है और पैरावेटों के कार्य बहिष्कार से व्यवस्था और प्रभावित हुई है।

बसंतपुर में 1800 मवेशी, ग्रामीणों को इंतजार

बसंतपुर ग्राम पंचायत में करीब 1800 मवेशी हैं। प्रधान प्रतिनिधि ललित सिंह के अनुसार गांव में अभी तक टीकाकरण अभियान प्रभावी तरीके से शुरू नहीं हो सका है। ग्रामीणों ने अभियान को गति देने की मांग की है।
हेमनापुर में निजी टीकाकरण का बढ़ा खर्च
फखरपुर ब्लॉक के हेमनापुर में टीकाकरण टीम नहीं पहुंचने से कुछ पशुपालक निजी चिकित्सकों का सहारा ले रहे हैं। प्रधान शुभम सिंह के अनुसार निजी स्तर पर एक पशु के टीकाकरण के लिए करीब 300 से 400 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। सरकारी अभियान प्रभावित होने का आर्थिक असर सीधा पशुपालकों पर पड़ रहा है।

-इनसेट
टैग से भी मिलान जरूरी, कई पशुओं का रिकॉर्ड अधूरा

अभियान के तहत टीकाकरण के साथ पशुओं के कान में टैग लगाने और उसका रिकॉर्ड दर्ज करने की व्यवस्था भी अहम है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई पशुओं में टैग नहीं लगे होने या टैग के रिकॉर्ड को लेकर पशुपालकों में स्पष्टता नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में टीका लगे और छूटे पशुओं के आंकड़ों का मिलान करना भी चुनौती बन गया है।
-इनसेट
ओटीपी ने बढ़ाई ग्रामीणों की परेशानी

टीकाकरण प्रक्रिया में ओटीपी आधारित सत्यापन किया जा रहा है। पशुपालक के मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्टफोन की उपलब्धता कम होने से भी टीकाकरण प्रक्रिया प्रभावित होने की शिकायतें हैं।

-इनसेट
एक टीम पर कितना बोझ
जिले के 6,16,300 पशुओं के लक्ष्य को 32 पशु चिकित्सक स्तर के अधिकारियों के बीच बांटने पर औसतन करीब 19,259 पशु प्रति अधिकारी का भार बैठता है। हालांकि वास्तविक माइक्रोप्लान में पशु चिकित्सकों, पैरावेट और अन्य कर्मियों के आधार पर अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। पैरावेट के कार्य बहिष्कार से इन टीमों की स्थिति शून्य है।
-इनसेट
वैक्सीन पर्याप्त, लगाने वाले हाथ कम

जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश कुमार उपाध्याय के अनुसार जिले में पशु रोगों से संबंधित वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। पैरावेट के कार्य बहिष्कार से समस्या जरूर आई है, लेकिन पशु चिकित्सकों और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की मदद से टीकाकरण कराया जा रहा है।
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-इनसेट
फैक्ट फाइल
टीकाकरण अभियान की शुरुआत : 22 जुलाई
जिले में टीकाकरण का लक्ष्य : 6,16,300 पशु
अब तक हुआ टीकाकरण : करीब एक लाख
उपलब्ध पशु चिकित्सक स्तर के अधिकारी : 32
पैरावेट कार्य बहिष्कार पर : 220
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